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सुप्रीम फैसलाः आधार इन सेवाओं के लिए जरूरी, यहां नहीं पड़ेगी जरूरत

Wed, 26 Sep 2018 12:50 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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aadhaar
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आधार नंबर की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बहुत सारी सेवाओं के लिए इसका प्रयोग बरकरार रखा है। हालांकि कोर्ट ने कई सेवाओं में आधार नंबर का प्रयोग करना अवैध करार कर दिया है। आइये जानते हैं कि किन सेवाओं के लिए आधार कार्ड जरूरी और गैर-जरूरी हो गया है।
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आधार जरूरी आधार जरूरी नहीं
राशन स्कूल एडमिशन
पैन कार्ड सीबीएसई परीक्षा
आयकर रिटर्न बैंक खाता
वृद्धावस्था पेंशन मोबाइल सिम
दिव्यांग पेंशन जेईई, कैट, नेट जैसी परीक्षा
नेत्रहीन पेंशन  
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यह राष्ट्र की जीत

साइबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल ने कहा कि, "कोर्ट ने आधार की कानूनी संवैधानिकता को वैध किया है। यह आधार की जीत है, यह सरकार की जीत है। भारत एकमात्र राष्ट्र है पूरी दुनिया में जहां पर पहली बार आधार को जारी किया गया है। आज के फैसले से आम जनता का उत्पीड़न बंद हो जाएगा। इससे लोगों को राहत मिली। अब निजी मोबाइल कंपनियां और बैंक आपसे खाता खुलवाने या फिर सिम लेने के लिए आधार देना बाध्य नहीं कर सकते हैं"।

नष्ट करना होगा डाटा

पवन दुग्गल ने कहा कि कोर्ट के इस फैसले के बाद अब कंपनियों को आपका आधार डाटा नष्ट करना पड़ेगा। हालांकि ऐसा होने पर ग्राहकों को एक बार से केवाईसी की औपचारिकता को पूरा करना पड़ेगा। इसके लिए भी सरकार को नए नियम बनाने पड़ेंगे। अब आप फिर से पासपोर्ट, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड जैसे दस्तावेज की मदद से फिर से केवआईसी कर सकते हैं।
 
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आधार की संवैधानिक वैधता बरकरार

सुप्रीम कोर्ट
उच्चतम न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी ने आधार पर फैसला देते हुए कहा कि संवैधानिक रूप आधार वैध है। आधार की संवैधानिक वैधता और इसे लागू करने वाले वर्ष 2016 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर साढ़े चार महीने बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।

कोर्ट ने कहा कि सर्वश्रेष्ठ होने के मुकाबले अनूठा होना बेहतर है, आधार का अर्थ अनूठा है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आधार के लिए यूआईडीएआई ने न्यूनतम जनांकीकीय और बायोमेट्रिक आंकड़े एकत्र किये।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि आधार का लक्ष्य कल्याणकारी योजनाओं को समाज के वंचित तबके तक पहुंचाना है और वह ना सिर्फ व्यक्तिगत बल्कि समुदाय के दृष्टिकोण से भी लोगों के सम्मान का ख्याल रखती है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि आधार जनहित में बड़ा काम कर रहा है और आधार का मतलब है अनोखा और सर्वश्रेष्ठ होने के मुकाबले अनोखा होना बेहतर है। न्यायमूर्ति सीकरी ने कहा, किसी भी बच्चे को आधार नंबर नहीं होने के कारण लाभ/सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता है।
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