'पूर्वोत्तर विविध राष्ट्र का सबसे विविध हिस्सा'
उन्होंने कहा, 'भारत को दुनिया का सबसे विविध राष्ट्र कहा जाता है। हमारा पूर्वोत्तर इस विविध राष्ट्र का सबसे विविध हिस्सा है। व्यापार से परंपरा तक, कपड़ा उद्योग से पर्यटन तक पूर्वोत्तर की विविधता उसकी बहुत बड़ी ताकत है।'
'पूर्वोत्तर पूर्वी भारत का सबसे अहम अंग'
पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए पूर्वी भारत का विकसित होना बहुत जरुरी है। पूर्वोत्तर पूर्वी भारत का सबसे अहम अंग है। हमारे लिए EAST का मतलब है - Empower (सशक्तीकरण), Act (काम), Strengthen (सुदृढ़ीकरण) and Transform (परिवर्तन). पूर्वी भारत के लिए यही हमारी सरकार की नीति है।
'पूर्वोत्तर के साथ हमने दिल से रिश्ता बनाया'
उन्होंने कहा, 'पिछले 11 वर्षों में जो परिवर्तन पूर्वात्तर में आया है, वो केवल आंकड़ों की बात नहीं है। वो जमीन पर महसूस होने वाला बदलाव है। हमने पूर्वोत्तर के साथ केवल योजनाओं के माध्यम से रिश्ता नहीं जोड़ा, हमने दिल से रिश्ता बनाया है। 700 से ज्यादा बार हमारे केंद्र सरकार के मंत्री पूर्वोत्तर गए हैं। उन्होंने उस मिट्टी को महसूस किया, लोगों की आंखों में उम्मीद देखी और उस भरोसे को विकास की नीति में बदला। हमने इंफ्रास्ट्रक्चर को सिर्फ ईंट और सीमेंट से नहीं देखा, हमने उसे भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम बनाया है। हम लुक ईस्ट से आगे बढ़कर एक्ट ईस्ट के मंत्र पर चले। एक समय था, जब पूर्वोत्तर को सिर्फ सीमांत क्षेत्र कहा जाता था। आज ये विकास का अग्रणी बन रहा है।'
'पूर्वोत्तर के तो कल्चर में ही म्यूजिक है, डांस है, सेलिब्रेशन'
उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के तो कल्चर में ही म्यूजिक है, डांस है, सेलिब्रेशन है। इसलिए वैश्विक सम्मेलन हो, संगीत कार्यक्रम हो या फिर Destination Weddings (गंतव्य विवाह) के लिए भी पूर्वोत्तर बेहतरीन जगह है। एक तरह से पूर्वोत्तर टूरिज्म के लिए एक सम्पूर्ण पैकेज है। अब पूर्वोत्तर में विकास का लाभ कोने-कोने तक पहुंच रहा है, तो इसका भी सकारात्मक असर पर्यटन पर पड़ रहा है। वहां पर्यटकों की संख्या दोगुनी हुई है।
'हमारा ध्यान पूर्वोत्तर के युवाओं के भविष्य पर'
उन्होंने कहा, 'एक समय था, जब पूर्वोत्तर के साथ बम, बंदूक और ब्लोकेड का नाम जुड़ा हुआ था। इसका बहुत बड़ा नुकसान वहां के युवाओं को उठाना पड़ा। उनके हाथों से अनगिनत मौके निकल गए, लेकिन हमारा ध्यान पूर्वोत्तर के युवाओं के भविष्य पर है। इसलिए हमने एक के बाद एक शांति समझौते किए। युवाओं को विकास की मुख्यधारा में आने का अवसर दिया। पिछले 10-11 साल में 10 हजार से ज्यादा युवाओं ने हथियार छोड़कर शांति का रास्ता चुना है।'