भारतीय अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) की भूमिका बेहद अहम है। यह क्षेत्र न केवल रोजगार सृजन में योगदान देता है, बल्कि नवाचार और स्थानीय-क्षेत्रीय विकास को भी मजबूती प्रदान करता है। देशभर में एमएसएमई के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, फाइनेंस तक आसान पहुंच, सप्लाई चेन का आधुनिकीकरण, निर्यात क्षमता, कौशल विकास और नीति सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहराई से विचार-विमर्श के लिए अमर उजाला एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव का आयोजन कर रहा है।
नोएडा में MSME फॉर भारत कॉन्क्लेव का आयोजन 16 सितम्बर को दोपहर 11 से 2 बजे तक होगा। इसका अयोजन स्थल मॉडर्न पब्लिक स्कूल, सेक्टर-11 है। इस कार्यक्रम में उद्योग, व्यापार और विकास के क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख लोग शिरकत करेंगे।
कॉन्क्लेव का उद्देश्य एमएसएमई सेक्टर के लिए भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना है। इसमें फंडिंग के नए विकल्प, मार्केटिंग और ब्रांडिंग की नवीन तकनीकें, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर जोर दिया जाएगा। साथ ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, एमएसएमई का वैश्विक विस्तार करने और ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) योजना के तहत स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के उपायों पर भी चर्चा होगी।
नोएडा का एमएसएमई सेक्टर तेजी से विकसित हो रहा है, खासकर आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और एपेयरल एक्सपोर्ट में। क्षेत्र में कई छोटे और मझोले उद्यम (MSMEs) ने उत्पादन, नवाचार और रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं।
नोएडा स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती उत्पादन लागत, लॉजिस्टिक और परिवहन में भीड़भाड़, और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा उद्योग के लिए गंभीर समस्याएं बन गई हैं।
उद्योग जगत के अनुसार, इन कारणों से कई कंपनियों की लाभप्रदता प्रभावित हो रही है और नई तकनीकों में निवेश धीमा हो गया है। विशेषकर छोटे और मझोले उद्यम इन दबावों का सामना करने में अधिक असमर्थ दिख रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर सरकार औद्योगिक नीतियों में सुधार नहीं करती और अवसंरचना के मुद्दों को प्राथमिकता नहीं देती, तो नोएडा का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकता है।