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भारत का मोबाइल उत्पादन केंद्र बना नोएडा, अब स्मॉर्टफोन पर होगा 'मेड इन इंडिया' का स्टीकर

Fri, 26 Aug 2016 10:07 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : Demo
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मोबाइल से जुड़े लगभग सभी प्रोडक्ट्स नोएडा में मिलते हैं। फिर चाहें वो आपके किसी ब्रांडेड स्मॉर्टफोन के बैक कवर हों या फिर किसी लोकल मोबाइल फोन का कोई पुर्जा या बैक कवर हो, यहां सब मिलता है। और इसी के चलते नोएडा अब भारत का मोबाइल उत्पादन केंद्र बन गया है।
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यदि आप अपने सैमसंग स्मॉर्टफोन या किसी देसी फोन जैसे कॉर्बन, लावा, इंटेक्स का बैक कवर खोलते हैं तो अब आपको 'मैड इन इंडिया' लिखा हुआ स्टीकर दिखेगा। और यह पूरी संभावना है कि वह फोन नोएडा, ग्रेटर नोएडा में ही बना हुआ हो।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक जब से केंद्र सरकार ने पिछले बजट में इंपोर्टेड डिवाइस और स्थानीय बनी डिवाइसों की ड्यूटी पर 10.5% का अंतर किया, तब से नोएडा, ग्रेटर नोएडा भारत का सबसे बड़ा स्मार्टफोन हब बन गया है।
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ज्यादातर महत्वपूर्ण पार्ट अभी भी चीन और ताइवान से आते हैं

- फोटो : file
आपको बता दें कि इसकी क्षमता साल भर में 140 मिलियन स्मार्टफोन बनाने की है और यह संख्या साल भर की डिमांड से 40% ज्यादा है। लेकिन इतना सब कुछ होने के बाद भी यहां क्वैलकम और मीडियाटेक प्रोसेसर नहीं बनते।

यहां ज्यादातर महत्वपूर्ण पार्ट अभी भी चीन और ताइवान से आते हैं। फिलहाल इतने बड़े स्तर पर स्मॉर्टफोन्स का प्रोडक्शन होना यहां की इंडस्ट्री के लिए बहुत बड़ी उपलब्धी है। सूत्रों के मुताबिक मौजूदा समय में स्थानीय इंडस्ट्रीज में डिवाइस के जरूरी पार्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा 5-8% है जोकि अगले पांच साल में 35% तक हो सकता है। इस क्षेत्र में इन्वेस्टमेंट के पीछे बड़ा हाथ सैमसंग और एलजी जैसी कोरियन कंपनियों का है।

आपको बता दें कि सैमसंग ने एक दशक पहले यहां मैन्युफैक्चरिंग शुरू की थी। सैमसंग अभी भी नोएडा में सबसे ज्यादा स्मॉर्टफोन बनाने वाला ब्रांड है। सूत्रों की मानें तो मौजूदा समय में सैमसंग की क्षमता साल में 40 मिलियन स्मार्टफोन बनाने की है। हालांकि कंपनी ने इस संख्या की पुष्टि नहीं की है। 

फैक्ट्रियां 3,000-4,000 डायरेक्ट जॉब्स के मौके देती हैं

सैमसंग ने इलाके में स्मार्टफोन कंपोनेंट्स के बहुत से सप्लायर्स भी जेनरेट किए हैं। यह कंप्लीटली नॉक्ड-डाउन (CKD)किट्स से स्मार्टफोन बनाता है। सैमसंग के प्रवक्ता का कहना है कि, 'हम जो भी फोन भारत में बेचते हैं जिनमें फीचर फोन से लेकर गैलेक्सी एस7 तक सब हमारी नोएडा फैक्ट्री में ही बनते हैं।

अब हम भविष्य में भी यहां निवेश के मौके ढूंढते रहेंगे।' भारतीय ब्रांड्स ने भी विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर अच्छी खासी पैठ बना रखी है। इस कंपटीशन का सीधा लाभ युवाओं को भी मिल रहा है। यह फैक्ट्रियां 3,000-4,000 डायरेक्ट जॉब्स के मौके देती है।

इनमें दसवीं पास से लेकर आईटीई ग्रैजुएट्स काम करते हैं। बिजनस डेस्टिनेशन के तौर पर उत्तर प्रदेश की इमेज संदेहपूर्ण है लेकिन दिल्ली से नजदीक होने के कारण कंपनियों को निश्चित रूप से सुविधा हुई है।
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यह 'मेक इन इंडिया' का अहम हिस्सा

- फोटो : getty images
इंटेक्स की नोएडा में 3 बड़ी फैक्ट्रियां पहले से ही मौजूद है। इन फैक्ट्रियों में हर साल 30 मिलियन फीचर और स्मॉर्टफोन बनते हैं। इसी क्रम में इंटेक्स अब ग्रेटर नोएडा के कसाना में 20 एकड़ में बड़ा कारखाना स्थापित करने जा रहा है। इससे जॉब्स के मौके तो बढ़ेंगे ही साथ में मोबाइल प्रोडक्शन में नोएडा और आगे जाएगा।

आईटी मिनिस्टर रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए और भी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस कर रही है क्योंकि यह 'मेक इन इंडिया' का अहम हिस्सा है।

उन्होंने कहा, मौजूदा समय में निवेश से 40,000 प्रत्यक्ष नौकरियों व 1.2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। हमारा मानना है कि 2019 तक मोबाइल फोन प्रोडक्शन 500 मिलियन डिवाइस तक पहुंच जाएगा। 
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