जानकारों का कहना है कि एएआर के आदेश के बाद ऐसे शॉप पर चिंता का बादल घिर आया था, क्योंकि पुरानी अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में ऐसे शॉप को केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) और मूल्य वर्धित कर (वैट) से छूट मिली हुई थी। पुरानी व्यवस्था में ऐसे शॉप से होने वाली बिक्री को निर्यात माना जाता था।
एएमआरजी एंड एसोसिएट्स के पार्टनर रजत मोहन ने कहा कि ड्यूटी फ्री शॉप को पूरी दुनिया में कर निरपेक्ष दर्जा मिला हुआ है और इस पर एक अंतरराष्ट्रीय सहमति है। ईवाई के पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा कि ऐसी बिक्री निर्यात की तरह है और यह एक घोषित नीति है कि वस्तुओं के निर्यात पर कर नहीं लगाया जाना चाहिए।