नीति आयोग के महिला उद्यमिता मंच (डब्ल्यूईपी), ट्रांस यूनियन सिबिल और माइक्रोसेव कंसल्टिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाएं अपने क्रेडिट स्कोर पर सक्रिय नजर रख रही हैं। खास बात है कि छोटे शहरों की महिलाएं मेट्रो शहरों की तुलना में अपने क्रेडिट की खुद सक्रिय निगरानी कर रही हैं।
देश में महिलाएं कारोबारी और अन्य जरूरतों के लिए तेजी से कर्ज ले रही हैं। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित उत्तरी-मध्य राज्यों में पिछले पांच वर्षों में सक्रिय महिला उधारकर्ताओं की संख्या सालाना 22 फीसदी की चक्रवृद्धि दर से बढ़ी है। नीति आयोग की ओर से सोमवार को लॉन्च 'उधारकर्ताओं से बिल्डरों तक : भारत की वित्तीय विकास की कहानी में महिलाओं की भूमिका' रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 से 2024 तक व्यावसायिक ऋण में महिलाओं की हिस्सेदारी 14 फीसदी और गोल्ड लोन में 6 फीसदी बढ़ी है। दिसंबर, 2024 तक कुल व्यावसायिक उधारकर्ताओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 35 फीसदी पहुंच गई। इनमें छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों की महिलाओं का हिस्सा 60 फीसदी रहा।
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क्रेडिट स्कोर पर नजर रखने में छोटे शहरों की महिलाएं आगे
नीति आयोग के महिला उद्यमिता मंच (डब्ल्यूईपी), ट्रांस यूनियन सिबिल और माइक्रोसेव कंसल्टिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाएं अपने क्रेडिट स्कोर पर सक्रिय नजर रख रही हैं। खास बात है कि छोटे शहरों की महिलाएं मेट्रो शहरों की तुलना में अपने क्रेडिट की खुद सक्रिय निगरानी कर रही हैं। ऐसी महिलाओं की संख्या छोटे शहरों में 48 फीसदी और मेट्रो क्षेत्रों में 30 फीसदी बढ़ी है।
दिसंबर, 2024 तक 2.7 करोड़ महिलाएं अपने क्रेडिट की निगरानी कर रही थीं, जो सालाना आधार पर 42 फीसदी अधिक है। यह महिलाओं में बढ़ती वित्तीय जागरूकता का संकेत है।
2024 में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में अपने क्रेडिट स्कोर की सक्रिय निगरानी रखने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 49 फीसदी पहुंच गई।
महिला उद्यमिता बढ़ाने से 17 करोड़ मिलेंगे रोजगार
नीति आयोग के प्रमुख आर्थिक सलाहकार और डब्ल्यूईपी के मिशन निदेशक अन्ना रॉय ने कहा, महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करना देश में कार्यबल में आने वाली महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने का तरीका है। यह समान आर्थिक विकास को गति देने के लिए एक व्यवहार्य रणनीति के रूप में भी काम करता है। महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने से 15 से 17 करोड़ लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं और श्रमबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ सकती है।
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चुनौती...समान वित्तीय पहुंच के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने कहा, सरकार मानती है कि फंडिंग तक पहुंच महिला उद्यमिता के लिए बुनियादी जरूरत है। महिला उद्यमिता मंच एक समावेशी तंत्र बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जो वित्तीय साक्षरता, कर्ज तक पहुंच, सलाह और बाजार संबंधों को बढ़ावा देता है। हालांकि, खराब बैंकिंग अनुभव, कर्ज मिलने में बाधाएं और गारंटर के साथ समस्याएं जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। समान वित्तीय पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है।