अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट की ओर से टैरिफ को अवैध घोषित करने और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ के नए एलानों के बाद दुनियाभर के बाजार में हलचल है। इस अहम मुद्दे पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी सोमवार को प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से टैरिफ में बदलावों (अब 15%) का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा, इसका आकलन करना अभी बहुत जल्दबाजी है। उन्होंने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय फिलहाल स्थिति की समीक्षा कर रहा है।
सोने की कीमतों में उछाल की असली वजह
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के केंद्रीय निदेशक मंडल के साथ बजट के बाद होने वाली पारंपरिक बैठक के बाद, वित्त मंत्री ने सोने की बढ़ती कीमतों से जुड़ी मौजूदा चिंताओं को भी संबोधित किया। उन्होंने साफ किया कि सोने की कीमतों में हालिया उछाल का मुख्य कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की ओर से की जा रही भारी खरीदारी है।
सीतारमण ने कहा, "आज अधिकांश देश, विशेष रूप से उनके केंद्रीय बैंक, सोना और चांदी खरीद रहे हैं और उनका भंडारण कर रहे हैं"। इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि सोना हमेशा से भारतीय परिवारों के लिए एक पसंदीदा निवेश रहा है और त्योहारी सीजन के दौरान इसकी मांग आमतौर पर बढ़ जाती है।
आईडीएफसी बैंक में गड़बड़ी पर क्या बोलीं वित्त मंत्री?
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के बारे में, सीतारमण ने कहा कि 'इसमें किसी प्रकार की कोई प्रणालीगत समस्या नहीं है,' और यह भी कहा कि नीति के तौर पर सरकार व्यक्तिगत कंपनियों पर टिप्पणी नहीं करती है।
वित्त मंत्री की दो टूक- मिस-सेलिंग अपराध है, बैंक अपना मूल काम करें'
बैंकों द्वारा ग्राहकों को जबरन बीमा या अन्य वित्तीय उत्पाद बेचना (मिस-सेलिंग) एक अपराध है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को बैंकों को यह सख्त चेतावनी देते हुए उन्हें अपने मूल व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित करने की दो टूक नसीहत दी है।
सोने की कीमतों पर क्या बोलीं वित्त मंत्री?
सोने की कीमतों पर निवेशकों और आम जनता को आश्वस्त करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार और आरबीआई स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। हालांकि, सीतारमण ने राहत देते हुए यह भी कहा कि कीमतों में वृद्धि अब तक किसी खतरनाक स्तर पर नहीं पहुंची है। कुल मिलाकर, अमेरिका की नई व्यापार नीतियों के बीच भारत सावधानीपूर्वक स्थिति का आकलन कर रहा है, जबकि घरेलू मोर्चे पर महंगाई और कमोडिटी बाजार पर कड़ी नजर रखी जा रही है।