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NextGen GST Reforms: शेयर बाजार पर आज दिख सकता है सकारात्मक असर; 1.98 लाख करोड़ की खपत बढ़ने का अनुमान

Thu, 04 Sep 2025 05:10 AM IST
बशु जैन बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जीएसटी में बदलाव के फैसले के बाद शेयर बाजार में बृहस्पतिवार को तेजी दिख सकती है। वहीं जीएसटी 2.0 के तहत सरकारी खजाने को सालाना औसतन 85,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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जीएसटी काउंसिल ने अप्रत्यक्ष करों की दरों में ऐतिहासिक सुधार करते हुए चार की जगह अब सिर्फ दो जीएसटी स्लैब को मंजूरी दे दी। काउंसिल में सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों ने आम सहमति से जीएसटी की सिर्फ दो दरों, 5 और 18 फीसदी को मंजूरी दी। जीएसटी के इस बड़े फैसले से शेयर बाजार में बृहस्पतिवार को तेजी दिख सकती है। वहीं जीएसटी 2.0 के तहत सरकारी खजाने को सालाना औसतन 85,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। 
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शेयर बाजार पर दिखेगा सकारात्मक असर
जीएसटी बदलावों को लेकर विश्लेषकों का मानना है, लंबे समय से तय दायरे में कारोबार कर रहा बाजार अभी से दिवाली तक तेजी में रह सकता है। जो तेजी अक्तूबर में आनी थी, वह अब सितंबर से शुरू हो सकती है। घरेलू शेयर बाजारों ने इस साल निवेशकों को निराश किया है, अभी तक सिर्फ दो फीसदी का फायदा दिया है।

1.98 लाख करोड़ की बढ़ेगी खपत
एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, जीएसटी 2.0 के तहत सरकारी खजाने को सालाना औसतन 85,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। पर, इससे खपत में 1.98 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। वहीं, जेफरीज व माॅर्गन स्टैनली का आकलन है कि 2.4 लाख करोड़ की अतिरिक्त मांग बढ़ सकती है।
  • खपत बढ़ने से खुदरा महंगाई में कोई इजाफा नहीं होगा, क्योंकि जीएसटी 2.0 में व्यापक उपभोग की वस्तुओं पर कर कम होंगे।
  • जरूरी वस्तुओं (खाद्य व कपड़ा) पर जीएसटी 12 फीसदी से घटकर पांच फीसदी होने से इस श्रेणी में खुदरा महंगाई 0.15 फीसदी तक कम हो सकती है।
  • जीएसटी और आयकर दरों में कटौती को मिलाकर उपभोग खर्च में 5.31 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि होगी। यह जीडीपी का करीब 1.6 फीसदी है।
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48,000 करोड़ में से 43,000 करोड़ की रिकवरी
अनुमान है कि स्लैब घटने से 2023-24 के आधार पर 48,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। हालांकि, लग्जरी व तंबाकू जैसे पदार्थों पर 40 फीसदी के टैक्स से 43,000 करोड़ रुपये की कमाई बढ़ेगी। शुद्ध घाटा 5,000 करोड़ रुपये ही होगा।
  • एसबीआई रिसर्च का अनुमान है, अल्पकालिक दबावों के बावजूद राज्यों को शुद्ध लाभ होगा। राज्य जीएसटी में कम-से-कम 10 लाख करोड़ मिलेंगे। साथ ही, हस्तांतरण के जरिये भी 4.1 लाख करोड़ रुपये की रकम मिलेगी। इस तरह, राज्यों को कुल 14.1 लाख करोड़ से अधिक राजस्व मिलने का अनुमान है। हिमाचल, झारखंड, कर्नाटक, केरल, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना और प. बंगाल सहित आठ विपक्षी शासित राज्यों का 1.5 से 2 लाख करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का अनुमान है।  
  • प्रभावी भारित औसत जीएसटी दर 2017 के 14.4 फीसदी से घटकर 2019 में 11.6 फीसदी रह गई थी। अब 9.5 फीसदी हो सकती है। पहले के सुधारों से पता चलता है कि शुरुआत में राजस्व में गिरावट आई, फिर जोरदार उछाल आया।

सात दिन में पूरी होगी रिफंड की प्रक्रिया
जीएसटी परिषद ने महत्वपूर्ण फैसले में सात दिन में रिफंड की प्रक्रिया पूरी करने को मंजूरी दी है।  निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा,  इससे निर्यातकों पर नकदी का दबाव बेहद कम हो जाएगा। समय पर और पूर्वानुमानित रिफंड भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। खासकर जब वैश्विक मांग अनिश्चित है।  n1,000 रुपये से कम के जीएसटी रिफंड से ई-कॉमर्स निर्यातकों को काफी लाभ होगा।

मौजूदा ई-वे बिल वैध
सरकार ने स्पष्ट किया कि सीजीएसटी एक्ट-2017 के नियम 138 के मुताबिक, नई दरें लागू होने पर ई-वे बिल रद्द करने और नए सिरे से तैयार करने की अनिवार्यता नहीं है। मौजूदा ई-वे बिल वैध बने रहेंगे।
  • हालांकि, दर में बदलाव लागू होने के दिन से पहले के स्टॉक पर संशोधित दर लागू होंगी। सरकार ने बताया कि जीएसटी आपूर्ति पर लगता है। संशोधित अधिसूचना के दिन या उसके बाद आपूर्ति वस्तुओं पर नई दरें लगेंगी।
  • वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, हमने शुल्क ढांचे की समस्याएं ठीक की हैं, वर्गीकरण संबंधी मुद्दों को सुलझाया है। अब मुआवजा, पंजीकरण को सरल बनाने, रिटर्न व रिफंड के मुद्दों पर ध्यान देंगे।

वाहन, इलेक्ट्रॉनिक व एफएमसीजी की होगी भारी बिक्री
विश्लेषक मानते हैं कि जिन लोगों ने जीएसटी सुधार के कारण खरीदी टाल दी थी, वे अब इस महीने के अंत से दिवाली तक जमकर खरीदी करेंगे। इसमें ज्यादातर दोपहिया वाहन, चार पहिया वाहन, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और एफएमसीजी के खास उत्पाद हो सकते हैं। अक्तूबर व नवंबर में इनकी बिक्री से दिसंबर में भी जीएसटी संग्रह मजबूत रहेगा। अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी और तीसरी तिमाही के जब जीडीपी के आंकड़े आएंगे, तो इनका योगदान दिखेगा। एफएमसीजी कंपनियाें ने भी तैयारी शुरू कर दी है। 22 सितंबर के बाद जो भी उत्पाद बाजार में आएंगे, वे सस्ते मिलेंगे।
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