टैरिफ झटकों के कारण अगस्त में भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की रिपोर्ट के अनुसार नए निवेशकों की संख्या मासिक आधार पर 18.3 प्रतिशत कम हो गई।
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रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में एक्सचेंज में केवल 12.3 लाख नए निवेशक पंजीकृत हुए। यह चालू वित्त वर्ष में तीसरी बार सबसे कम मासिक वृद्धि है। मंदी के बावजूद, एनएसई का समग्र पंजीकृत निवेशक आधार अगस्त 2025 के अंत तक 11.9 करोड़ तक बढ़ गया। यह 12 करोड़ के महत्वपूर्ण मील के पत्थर के करीब है। नई पंजीकरणों में कमी मौजूदा आर्थिक मुश्किल हालात की वजह से आई है।
टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितताओं ने डाला असर
इसमें कहा गया है कि टैरिफ संबंधी झटके और बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी पूंजी के निरंतर बहिर्गमन ने हाल के महीनों में निवेशकों की धारणा पर प्रभाव डाला है। कैलेंडर वर्ष 2025 की शुरुआत से, मई से जुलाई की अवधि को छोड़कर, निवेशकों की संख्या में गिरावट का रुख रहा है। अगस्त के आंकड़े इस मंदी को और बढ़ा रहे हैं। इससे शेयर बाजारों में सतर्कता का माहौल स्पष्ट हो रहा है।
नए निवेशकों की संख्या में आई गिरावट
रिपोर्ट में बताया गया है कि निवेशक आधार के विस्तार की गति पिछले वर्ष की तुलना में काफी धीमी हो गई है। फरवरी और अगस्त 2025 के बीच, प्रति माह जुड़ने वाले नए निवेशकों की औसत संख्या 11.9 लाख रही। यह 2024 में इसी अवधि के दौरान दर्ज किए गए 19.2 लाख निवेशकों की औसत मासिक वृद्धि से काफी कम है।
बाजार की वृद्धि दर सकारात्मक रही
हालांकि, पिछले दो वर्षों में बाजार की वृद्धि दर उल्लेखनीय रही है। फरवरी 2024 में 9 करोड़ निवेशकों का आंकड़ा पार करने के बाद, एनएसई का पंजीकृत आधार अगस्त 2024 तक 10 करोड़ और जनवरी 2025 तक 11 करोड़ तक पहुंच गया। प्रत्येक करोड़ निवेशक केवल पांच से छह महीने की अवधि के भीतर जुड़े, जो उस अवधि के दौरान मजबूत खुदरा भागीदारी को दर्शाता है।
इसके विपरीत, रिपोर्ट में बताया गया है कि फरवरी से अगस्त 2025 तक के महीनों में गति में उल्लेखनीय कमी देखी गई। निवेशक आधार का संरचनात्मक विस्तार तो जारी है, लेकिन निकट भविष्य की चुनौतियों ने नए पंजीकरणों की गति को धीमा कर दिया है।