देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को नई दिशा देने, उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सशक्त बनाने और “वोकल फॉर लोकल” के विजन मजबूती देने के उद्देश्य से अमर उजाला की ओर से भारत मंडपम, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव, एक्सपो व अवार्ड्स 2025 का आयोजन जारी है। कार्यक्रम के दौरान वित्तीय जगत के दिग्गजों ने पूजी निर्माण, नीति और नवाचार से जुड़े अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान फंडिंग का फ्यूचर सत्र में एसबीआई के पूर्व चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि सरकार के सपोर्ट की बात करें तो एमएसएमई क्षेत्र में बेहतर इकोसिस्टम को बनाने में इससे मदद मिलती है। कैपेक्स के लिए क्रेडिट फॉर्मल बैंकिंग सिस्टम से मिलती है। केवल बैंकों को डिपॉजिट लेने की मंजूरी है। ऐसे में वे संसाधनों को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। आज 2.5 मिलियन लैंडेबल मर्चेंट हैं। कैश भारपे पर दिखता है। हम पार्टनरशिप मॉडल पर काम कर रहे है। वे पैसे मुहैया करवा रहे हैं। वे ऋण मुहैया कराने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। देश में एमएसएमई को ऋण मुहैया कराने के लिए बहुत बढ़िया इकोसिस्टम तैयार हुआ है। आज यदि किसी को मशीन खरीदना हो चाहे वह 20 लाख का हो तो लोन आसानी से उपलब्ध है। दुनिया पिछले 30-40 वर्षेों में पूरी तरह से बदल गई है। ऐसा मैनुअल बैंकिंग से डिजिटल बैंकिंग की ओर बढ़ने से संभव हो पाया। सरकारी स्कीमों मुद्रा स्क्रीम, स्ट्रीट वेंटर स्कीमों के जरिए भी ऋण मुहैया कराने में मदद मिली है। हमें वेंचर कैपिटल को बढ़ाने की जरूरत है। हमें नई स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की जरूरत है चाहे वे सफल हों या नहीं। इसके लिए वेंचर कैपिटल को बढ़ाना पड़ेगा। यह हाई रिस्क कैपिटल है। इसके लिए इसके लिए बैंक आगे नहीं आते। इसे मुहैया कराने के लिए हमें कदम बढाने होंगे।
कार्यक्रम के दौरान पहले फंडिंग का फ्यूचर सत्र में एनएसआईसी के सीएमडी डॉ. शुभ्रांशु आचार्य, एसबीआई के पूर्व चेयरमैन रजनीश कुमार और मनीष शाह जैसे दिग्गजों ने एमएसएमई के लिए निवेश और पूंजी जुटाने के अवसरों पर अपने विचार साझा किए।
भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को समर्थन देने की रणनीतियों पर चर्चा करते हुए एनएसआईसी के सीएमडी डॉ. शुभ्रांशु आचार्य ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना कि एमएसएमई को आवश्यकता पड़ने पर आसानी से ऋण प्राप्त हो सके, और सुचारू ऋण प्रवाह के लिए उचित प्रबंधन और मार्गदर्शन उपलब्ध हो।
उन्होंने कौशल विकास के बारे में बोलते हुए कहा कि एमएसएमई को अपने व्यवसायों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जाना चाहिए। इसमें कौशल प्रशिक्षण, पुनः कौशलीकरण और अपस्किलिंग के अवसर प्रदान करना, जिसमें प्रौद्योगिकी केंद्र और उत्पाद परीक्षण सुविधाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि एमएसएमई के लिए 10,000 करोड़ रुपये के फंड ऑफ फंड्स का संचालन किया जाता है। इसका प्रबंधन एनएसआईसी करती है। इस फंड से एमएसएमई के विकास को अगले स्तर पर पहुंचाने में मदद मिल सकती है।