27 मार्च को एनसीएलटी ने अपने आदेश में आकाश एजुकेशनल सर्विसेज द्वारा इक्विटी फंड जुटाने की योजना के तहत शेयरधारिता में बदलाव न करने और यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश दिया था। बायजू ने इस आदेश के खिलाफ एनसीएलएटी की चेन्नई पीठ का रुख किया था।
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने बायजू द्वारा आकाश शेयरधारिता मामले में दायर याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका समाधान पेशेवर थिंक एंड लर्न द्वारा दायर की गई थी। बायजू का मालिकाना हक इसी कंपनी के पास है। याचिका में आकाश एजुकेशनल सर्विसेज में कंपनी की हिस्सेदारी के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के एनसीएलटी के आदेश को चुनौती दी गई थी।
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याचिका खारिज करते हुए एनसीएलएटी ने कहा- अभी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं
एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि चूंकि एनसीएलटी (NCLT) का आदेश सहमति से दिया गया एक अंतरिम आदेश है, जो दोनों पक्षों के किसी भी अधिकार पर कोई फैसला नहीं है, इसलिए इस स्तर पर अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। 27 मार्च को एनसीएलटी ने अपने आदेश में आकाश एजुकेशनल सर्विसेज द्वारा इक्विटी फंड जुटाने की योजना के तहत शेयरधारिता में बदलाव न करने और यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश दिया था। बायजू ने इस आदेश के खिलाफ एनसीएलएटी की चेन्नई पीठ का रुख किया था।
इस आदेश को आकाश ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी, जिसने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 8 अप्रैल, 2025 को एनसीएलटी द्वारा दिए गए अंतरिम आदेश को खारिज कर दिया और मामले को दिवालियापन न्यायाधिकरण को वापस भेज दिया। 30 अप्रैल, 2025 को अपनी अगली सुनवाई में इसे एनसीएलटी के संज्ञान में लाया गया, जहां समाधान पेशेवर के वरिष्ठ वकील अभिनव वशिष्ठ ने आरोप लगाया कि न केवल आकाश में टीएलपीएल (बायजू) की शेयरधारिता में कमी जारी है, बल्कि कंपनी की महत्वपूर्ण संपत्ति भी गिरवी रखी गई है।