केंद्र सरकार ने देश में प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए नेशनल पीएनजी ड्राइव 3.0 शुरू किया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बृहस्पतिवार को इस अभियान का शुभारंभ किया। इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा घरों तक पाइप के जरिए रसोई गैस पहुंचाना और ऊर्जा के कुल इस्तेमाल में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाना है। फिलहाल भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी करीब छह प्रतिशत है। यह अभियान एक अक्तूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक चलेगा। इसे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड के 20वें स्थापना दिवस के अवसर पर शुरू किया गया।
इस अभियान में कितने नए कनेक्शन देने का लक्ष्य है?
सरकार ने पीएनजी ड्राइव 3.0 के तहत नए उपभोक्ताओं को जोड़ने के साथ पुराने कनेक्शनों को दोबारा चालू करने पर भी जोर दिया है। इसके लिए तीन प्रमुख लक्ष्य तय किए गए हैं।
- 50 लाख नए घरेलू पीएनजी कनेक्शन: अधिक से अधिक घरों तक पाइप के जरिये प्राकृतिक गैस पहुंचाने का लक्ष्य है।
- 40 लाख निष्क्रिय कनेक्शन फिर चालू करना: ऐसे कनेक्शनों को दोबारा उपयोग में लाने की कोशिश होगी, जिनसे फिलहाल गैस का इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
- 50 लाख नए पंजीकरण: घरेलू पीएनजी के लिए नए उपभोक्ताओं का पंजीकरण बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
सरकार एलपीजी की जगह पीएनजी को क्यों बढ़ावा दे रही है?
हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, अभियान का उद्देश्य लोगों को एलपीजी से पीएनजी की ओर ले जाना, मौजूदा गैस नेटवर्क का बेहतर इस्तेमाल करना और ज्यादा घरों तक प्राकृतिक गैस पहुंचाना है। इसके लिए शहरों के साथ अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में भी नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। नए कनेक्शन देने के अलावा गैस वितरण व्यवस्था की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान रहेगा। सरकार का मानना है कि पाइप के जरिये मिलने वाली गैस से घरेलू ऊर्जा की उपलब्धता अधिक सुविधाजनक होगी और पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी।
देश में गैस पाइपलाइन नेटवर्क की स्थिति क्या?
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में अब तक 6,87,966 इंच-किलोमीटर पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया जा चुका है। इसके आधार पर करीब 1.30 करोड़ अतिरिक्त घरेलू पीएनजी कनेक्शन देने की क्षमता मौजूद है। वहीं, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड ने देशभर में करीब 34,233 किलोमीटर प्राकृतिक गैस पाइपलाइन नेटवर्क को मंजूरी दी है। इसमें मुख्य पाइपलाइन, सहायक लाइनें और अन्य संपर्क पाइपलाइन शामिल हैं।
जून 2025 तक इनमें से 25,429 किलोमीटर नेटवर्क चालू हो चुका था, जबकि 10,459 किलोमीटर पाइपलाइन का निर्माण अलग-अलग चरणों में चल रहा था। सरकार का लक्ष्य पाइपलाइन नेटवर्क को और विस्तार देना है, ताकि प्राकृतिक गैस की आपूर्ति ज्यादा क्षेत्रों तक पहुंच सके।
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पिछले अभियान का क्या नतीजा रहा और नई योजना से क्या उम्मीद?
इससे पहले चलाए गए पीएनजी ड्राइव 2.0 के तहत 12.10 लाख कनेक्शन, 13.37 लाख बिल्ड कनेक्शन और 15.31 लाख घरेलू पीएनजी पंजीकरण हासिल किए गए थे। इस दौरान रोजाना नए घरेलू पीएनजी कनेक्शन जोड़ने की दर में 43 प्रतिशत और बिलिंग वाले उपभोक्ताओं की संख्या में 166 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।
सरकार अब इसी काम को आगे बढ़ाना चाहती है। इसके लिए 'वन नेशन, वन गैस ग्रिड' के तहत प्रमुख पाइपलाइनों को मंजूरी देने, कम मांग वाले क्षेत्रों में वित्तीय सहायता, एकीकृत टैरिफ व्यवस्था, सिटी गैस वितरण नेटवर्क के विस्तार और एलएनजी टर्मिनल स्थापित करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार, इससे घरों के अलावा उद्योगों और परिवहन क्षेत्र में भी प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल बढ़ सकता है। उद्योगों को गैस मिलने से उत्पादन लागत घटाने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। सीएनजी और पीएनजी के विस्तार से वायु प्रदूषण कम करने के प्रयासों को भी गति मिल सकती है।