टाटा संस के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा देने और अपनी पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को पुनर्विचार के लिए बोर्ड के समक्ष न भेजने का फैसला किया है। इस निर्णय के सामने आने के बाद टाटा समूह के शेयरों पर इसका तात्कालिक असर देखने को मिला है। भारतीय उद्योग जगत और निवेशकों के बीच अब इस बात को लेकर गहन चर्चा शुरू हो गई है कि देश के इस सबसे बड़े औद्योगिक घराने का उत्तराधिकारी कौन होगा। हालांकि, बाजार के विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि इस इस्तीफे से टाटा समूह के शेयरों पर दीर्घकालिक रूप से कोई विशेष नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन अल्पावधि में कुछ दबाव अवश्य देखा जा सकता है। चंद्रशेखरन फरवरी 2027 तक अपने पद पर बने रहेंगे, जिससे समूह को सुचारू रूप से कार्यभार सौंपने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।
नटराजन चंद्रशेखरन ने बुधवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में खुलासा किया कि उनका यह फैसला अचानक नहीं आया है, बल्कि यह निर्णय कई महीनों से बोर्ड के भीतर चल रहे गतिरोध का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बोर्ड के निदेशकों में से एक उनके कार्यकाल के विस्तार का समर्थन नहीं कर रहा था, जिसके चलते उन्होंने अपनी पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को बोर्ड में न भेजने का फैसला किया।
साल 2017 में टाटा समूह की बागडोर संभालने के बाद से एन चंद्रशेखरन के नेतृत्व में समूह ने वित्तीय मोर्चे पर बेहतरीन उपलब्धियां हासिल की हैं:
इस बड़े कॉरपोरेट घटनाक्रम पर बाजार विश्लेषकों की राय बंटी हुई नहीं है, बल्कि वे इसे एक अस्थायी प्रभाव के रूप में देख रहे हैं: