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NABARD MSME: जीआई टैगिंग उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए नाबार्ड की पहल, 4000 एमएसएमई फर्म्स को मिलेगा लाभ

Fri, 08 Aug 2025 06:17 PM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

नाबार्ड ग्रामीण क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए राष्ट्रीय  कौशल विभाग के साथ मिलकर 4000 एटरप्राइजेज के लिए योजना शुरू करेगा। इसमें नाबार्ड उनको कारोबारी ट्रेनिंग देने, रिफाइनेंसिग करने, उत्पादों की मार्केटिंग और ब्रांडिग के साथ उनके उत्पादों के बेचने के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवाएगा।
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नाबार्ड - फोटो : Social Media
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विस्तार
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राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक ( नाबार्ड ) जल्द ही ग्रामीण क्षेत्र में एमएसएमई के लिए राष्ट्रीय  कौशल विभाग के साथ मिलकर 4000 एंटरप्राइजेज के लिए योजना शुरू कर रहा है। इसमें ग्रामीणों को कारोबारी ट्रेनिंग देने, रिफाइनेंसिग करने, उत्पादों की मार्केटिंग और ब्रांडिग के साथ उनके उत्पादों के बेचने के लिए मदद करेगा।

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नाबार्ड के मुख्य महाप्रंबधक डॉ. बीआर प्रेमी ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि नाबार्ड अब एमएसएमई क्षेत्र पर फोकस कर रहा है। हम पहले से ही ग्रामीण संस्थाओं एवं सहयोगी संस्थाओं के जरिए यहां के कृषि और गैर कृषि क्षेत्रों से जुड़े इंटरप्राइजेज को बढ़ावा दे रहे हैं। साथ ही अब हम ग्रामीण एंटरप्राइजेज और  ग्रामीण क्षेत्र के एमएसएमई को जोड़ रहे हैं। इसके लिए नाबार्ड ने अपनी गाइडलाइन को रिवाइज किया है और ग्रामीण एमएसएमई पॉलिसी शुरू की गई है।
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ग्रामीण एमएसएमई क्षेत्र को जोड़ने की योजना
प्रेमी ने बताया कि हम सरकार के राष्ट्रीय  कौशल विभाग के साथ मिलकर 4000 रूरल इंटरप्राइज प्रोमोशनल ऑर्गेनाइजेशन योजना शुरू कर रहे हैं। इसमें लगभग डेढ़ लाख लोगों को जोड़ा जाएगा। इसमें उनकों उद्यम पोर्टल पर कारोबार पंजीकृत करने, उत्पादों की ब्राडिंग और मार्केटिंग करने, मैन्यूफेक्चरिंग करने, उत्पादों की टेस्टिंग करने के साथ उनकों रिफाइनेंस की सहायता दी जाएगी। इस योजना के तहत एमएसएमई को रिफाइनेंस किया जाएगा, जिसमें में 40 प्रतिशत सरकार और 60 प्रतिशत नाबार्ड की ओर ऋण सहायता मिलेगी।

क्षेत्रिय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए 100 जीआई टैगिंग हो चुकी हैं
 बीआर प्रेमी बताते हैं कि नाबार्ड ने जीआई (भौगोलिक संकेत ) टैगिंग में अहम भूमिका निभा रहा है। हमने 7 हजार संस्थाओं के साथ जुड़कर 100 उत्पादों की जीआई टैंगिंग पूरी की है। नाबार्ड के पास इसके लिए 12 योजनाएं हैं। इसमें रूरल इंटरप्राइज प्रोमोशनल ऑर्गेनाइजेशन योजना मुख्य है। इसके जरिए बुनकर, स्टार्टअप, किसान और लेबर हमसे जुड़ते हैं। इन योजनाओं में उत्पादन क्षमता को बढ़ाने, मार्केटिंग करने, उत्पादन और जीआई टैग के लिए पंजीकृत होने में सहायता की जाती है। इनमें हेंडलूम, खिलौने, फुटवियर सहित फूड प्रोसेसिंग उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों की अपनी क्षेत्रिय विशेषता होती है, जिसको बनाने में काफी समय लगता है। इनकी मांग घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में होती है, जिनकों खरीदने के लिए काफी पैसे भी लगते हैं। इन उत्पादों को जीआई टैगिंग होने के बाद कई बार बढ़ावा नहीं मिलता इसके लिए नाबार्ड बाजार दिलवाने, उद्यमों और किसानों को इसके बारे में परामर्श और वित्तीय सहायता और मार्केटिंग करने में नाबार्ड सहायता कर रहा है।

40 प्रतिशत एमएसएमई को 1200 करोड़ रुपये का सीधा ऋण
प्रेमी कहते हैं कि जैसे की सब जानते है कि नाबार्ड सीधा फाइनेंस नहीं देता है, हम रिफाइनेंस करते हैं। हमारे कुल ऋण में 40 प्रतिशत ऋण एमएसएमई क्षेत्र के लिए है। इसमें कृषि क्षेत्र , महिलाओं के सहकारी संस्थाएं, बुनकर, फूड प्रोसेसिंग और ग्रामीण स्टार्टअप्स जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं। इसके साथ ही मेगा फूड पार्क और एग्रो प्रोसेसिंग कलस्टर के लिए नाबार्ड का 2000 करोड़ रुपये फंड है, जिसमें से अभी तक 1200 करोड़ रुपये का फाइनेंस दिया जा चुका है। मेगा फूड पार्क, फूड प्रोसेसिंग और कलस्टर के लिए विशेष योजनाओं के तहत ही नाबार्ड सीधा ऋण प्रदान करता है। हम घरेलू स्तर पर ग्रामीण स्टार्टअप और एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने पर ध्यान दे रहे हैं, जिसके लिए भविष्य में नाबार्ड कई और नई योजनाओं को पेश करने पर विचार कर रहा है।

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टैरिफ से ग्रामीण स्तर से जुड़ी एमएसएमई पर प्रभाव
वे कहते हैं कि टेक्सटाइल और हेंडलूम क्षेत्र पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का प्रभाव पड़ेगा। हेंडलूम और टेक्सटाइल सहित फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र पर गंभीर प्रभाव देखने को मिलेगा। फिलहाल हम यह नहीं बता सकते कि कितने एमएसएमई इससे प्रभावित होंगे। लेकिन इसमें बड़े निर्यातक के साथ छोटे एमएसएमई क्षेत्रों पर भी असर पड़ेगा। ऐसे में वो छोटे एमएसएमई जो अपने कुछ विशेष उपभोक्ता तक माल सप्लाई करते हैं। उनको अधिक नुकसान होगा, उदाहरण के लिए एक महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप जो पारंपरिक हेंडलूम का काम करता है, अगर वह कुछ गिनती के अमेरिकी रिटेल को माल सप्लाई करता है, तो महंगे हुए टैरिफ की वजह से अब वह ऑर्डर रद्द कर सकते हैं।

टैरिफ के प्रभाव कम करने के लिए ऑर्गेनिक और नए बाजारों की आवश्यकता
  • अमेरिका द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के प्रभावों को कम करने के बारे में प्रेमी ने बताया कि पहले तो हमें अपने घरेलू बाजारों पर ध्यान देना होगा क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अब कहीं अधिक अनिश्चितता का माहौल है।
  • दूसरा ऑर्गेनिक उत्पादों पर ध्यान देने और आरएंड करने की जरूरत है, जिसकी मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक हो, पिछले कुछ वर्षों में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग ने जोर पकड़ा है। इस पर काम किया जा सकता है।
  • तीसरा विशेष उत्पाद यानी जीआई टैगिंग उत्पादों को बढ़ाने की जरूरत है, यह एक विशेष क्षेत्र और विशेष गुणवत्ता होने की वजह से इनकी मांग भी अधिक है।

स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा पर जोर
मौजूदा माहौल में हमें स्वदेशी उत्पादों को एक बार फिर बढ़ावा देने की जरूरत है। हाल ही में प्रधानमंत्री ने भी स्वेदशी उत्पादों को खरीदने के लिए कहा है। इसलिए नाबार्ड ने अपने देश भर के 17 कार्यकल में हेंडलूम प्रदर्शनी का आयोजन किया, जहां 7 से 8 राज्यों के बुनकरों ने हिस्सा लिया और जीआई टैंगिग उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। इसके जरिए हम स्वदेशी उत्पादों को बेचने के लिए प्लेटफॉर्म दे रहे हैं। यहां पर उनको बड़े खरीदारों के साथ अच्छे ऑर्डर मिल जाते हैं।

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