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उड़ान पर घमासान: एयरपोर्ट ऑपरेटर और विमानन कंपनियों के बीच किस बात का गतिरोध? सरकारी दखल के बाद टला ये फैसला

Wed, 07 Oct 2026 04:55 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल एक को फिर से विकसित करने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद 33% अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की कटौती टल गई है। आईएटीए ने पारदर्शी योजना और आपसी सहमति की मांग की है। पढ़िए पूरी विस्तृत रिपोर्ट।
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मुबंई एयरपोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 (T1) के पुनर्विकास को लेकर एयरपोर्ट ऑपरेटर और विमानन कंपनियों के बीच उपजे गतिरोध में केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप किया है। अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (एएएचएल) की ओर से मुंबई से 33 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को नवी मुंबई स्थानांतरित करने या रद्द करने के प्रस्ताव पर एयरलाइंस के तीव्र विरोध के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इस फैसले को टालने का निर्देश दिया है। 

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वैश्विक एयरलाइंस निकाय आईएटीए (इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन) ने मंत्रालय के इस कदम का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया है कि परिचालन और यात्रियों की सुविधा से जुड़ा कोई भी फैसला एकतरफा नहीं, बल्कि पारदर्शी मूल्यांकन और आपसी सहमति से होना चाहिए।

मुंबई एयरपोर्ट पर विवाद क्यों पैदा हुआ?

विवाद की मुख्य वजह मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एमआईएएल) की ओर से 46 अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को भेजा गया एक निर्देश था। इसमें 25 अक्तूबर 2026 (शीतकालीन शेड्यूल की शुरुआत) से टर्मिनल-2 (T2) से संचालित होने वाली अंतरराष्ट्रीय डिपार्चर स्लॉट्स में 33 प्रतिशत की कटौती करने या उड़ानों को नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्थानांतरित करने को कहा गया था। 

मौजूदा समय में 46 एयरलाइंस T2 से हर हफ्ते 770 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन करती हैं, जिनमें से 265 साभाविक विदेशी उड़ानों को अस्थायी रूप से बंद करने का प्रस्ताव था। दरअसल, जनवरी 2027 से छह दशक पुराने T1 के उत्तरी हिस्से को गिराकर पुनर्विकास कार्य शुरू होना है। T1 के घरेलू यात्रियों को T2 पर शिफ्ट करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्लॉट्स को खाली कराने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, AAHL का दावा है कि इस बदलाव से 91 प्रतिशत यात्री यातायात अप्रभावित रहेगा और T1 के पुनर्विकास से इसकी वार्षिक क्षमता 1.5 करोड़ (15 mppa) से बढ़कर 2 करोड़ (20 mppa) यात्री हो जाएगी।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के हस्तक्षेप से क्या बदला?

अदाणी ग्रुप के इस प्रस्ताव पर विमानन कंपनियों की ओर से जताए गए कड़े विरोध के बाद नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में हितधारकों की एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई। बैठक में मंत्रालय ने ऑपरेटर को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के प्रस्तावित स्थानांतरण को कुछ हफ्तों के लिए टालने की सलाह दी। इसके साथ ही, मंत्रालय ने एयरलाइंस और ऑपरेटर दोनों से नवी मुंबई हवाई अड्डे पर परिचालन स्थानांतरित करने के लिए एक ठोस और स्पष्ट योजना मांगी है। इस मुद्दे पर अंतिम सहमति बनाने के लिए एएएचएल और एयरलाइंस प्रतिनिधियों के बीच 13 अक्तूबर 2026 को अगली बैठक आयोजित होगी।

आईएटीए का क्या रुख है?

विश्व भर की 370 से अधिक एयरलाइंस का प्रतिनिधित्व करने वाले निकाय आईएटीए ने मंत्रालय के इस हस्तक्षेप की सराहना की है। आईएटीए के कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस प्रमुख अल्बर्ट त्यॉन्ग ने कहा कि T1 के पुनर्विकास और नवी मुंबई एयरपोर्ट के विकास का पूर्ण समर्थन किया जाता है, लेकिन एयरलाइन संचालन को प्रभावित करने वाले फैसलों में पारदर्शिता होनी अनिवार्य है। आईएटीए के अनुसार, क्षमता में कोई भी कटौती पारदर्शी मांग-क्षमता आकलन, प्रभावित एयरलाइंस के साथ सार्थक परामर्श और पर्याप्त समय सीमा पर आधारित होनी चाहिए। ये सिद्धांत नागरिक उड्डयन मंत्रालय के स्लॉट आवंटन दिशानिर्देशों और विश्वव्यापी एयरपोर्ट स्लॉट दिशानिर्देशों (WASG) के अनुरूप हैं।

नागरिक उड्डयन क्षेत्र और यात्रियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

मुंबई महानगरीय क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी और यात्री हितों की रक्षा के लिए एक संतुलित योजना का होना बेहद जरूरी है। यदि 265 साप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें अचानक कम होती हैं, तो इससे अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा महंगी हो सकती थी और कनेक्टिविटी पर असर पड़ता। 13 अक्तूबर की बैठक में यदि एयरलाइंस और ऑपरेटर के बीच आपसी सहमति से कोई संशोधित ट्रांजिशन प्लान बनता है, तो इससे बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के साथ-साथ यात्री असुविधा और एयरलाइन परिचालन में होने वाली बाधाओं को न्यूनतम किया जा सकेगा।

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मुंबई एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे का विस्तार देश की विमानन वृद्धि के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन इसे एयरलाइंस और यात्रियों की लागत पर लागू नहीं किया जा सकता। 13 अक्तूबर को होने वाली आगामी बैठक से यह तय होगा कि मुंबई एमएमआर क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को प्रभावित किए बिना नया ट्रांजिशन मॉडल कैसे आकार लेता है।

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