उद्योग संगठन एसोचैम ने कहा कि देश की सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयां अपनी पूरी क्षमता के मुताबिक आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। इसके पीछे लंबी नियामक देरी, भारी अनुपालन लागत और प्रभावी सिंगल-विंडो सिस्टम की कमी जैसी गंभीर बाधाएं जिम्मेदार हैं।
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राज्यों को तेजी से सुधार लागू करने की जरूरत
एसोचैम ने अपनी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि एमएसएमई को सशक्त बनाने के लिए राज्यों को तेजी से सुधार लागू करने होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, कई राज्यों में जटिल और अवसंरचना संबंधी बाधाएं अब भी व्यापार संचालन को धीमा कर रही हैं।
जीएसटी से जुड़ी समस्याओं का किया जिक्र
रिपोर्ट में कहा गया कि जीएसटी से जुड़ी समस्याएं जैसे कठिन पंजीकरण प्रक्रिया, रिफंड में देरी और लगातार होने वाले आईटीसी विवाद व्यापारियों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इसके अलावा, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे से जुड़ी बाधाएं, जैसे ई-वे बिल की अक्षमताएं और पश्चिम बंगाल व ओडिशा जैसे राज्यों में अविश्वसनीय बिजली आपूर्ति, उत्पादन में देरी और नुकसान का कारण बनती हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कंपनी कानून और बीआईएस के नियम एमएसएमई पर जटिल अनुपालन, निकासी प्रक्रिया और प्रमाणन में देरी का बोझ डालते हैं। वहीं, एफएसएसएआई के अस्पष्ट मानक, खासकर बायोटेक उत्पादों के मामले में, नियामक अनिश्चितता को और बढ़ा देते हैं। एसोचैम ने जोर दिया कि अगर इन बाधाओं को दूर किया जाए, तो एमएसएमई क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि को नई गति दे सकता है।
सिंगल-विंडो सिस्टम साबित हो सकता है गेम चेंजर
रिपोर्ट में यह जोर दिया गया है कि डिजिटल और समयबद्ध सिंगल-विंडो सिस्टम राज्यों में निवेश माहौल सुधारने के लिए पूरी तरह से गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।
एसोचैम ने कहा कि पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में मौजूदा सिस्टम बिखरे हुए हैं और अक्सर सिंगल विंडो की जगह मल्टीपल विंडो की तरह काम करते हैं। ऐसे में जरूरत है कि इन्हें पूरी तरह सुव्यवस्थित किया जाए, तय अनुमोदन समय-सीमा लागू की जाए और प्रक्रिया में स्पष्ट जवाबदेही तय हो।
दंड प्रणाली लागू करने पर दिया जोर
रिपोर्ट में स्तरीय दंड प्रणाली लागू करने और छोटे उद्यमों को अनिवार्य ऑडिट से छूट देने की सिफारिश की गई है, ताकि उन पर अनावश्यक अनुपालन बोझ कम हो सके। इसमें कहा गया है कि कई कानूनी और नियामक चुनौतियां पूरे राष्ट्रीय कारोबारी तंत्र में फैली हुई हैं, जो छोटे उद्योगों की गति को धीमा करती हैं। रिपोर्ट का कहना है कि केवल अनुपालन आसान बनाने से ही काम नहीं चलेगा एमएसएमई को कौशल विकास, तकनीकी अपनाने, नवाचार, निर्यात संवर्धन, और सरकारी योजनाओं की बेहतर जानकारी जैसे क्षेत्रों में भी मजबूत समर्थन की जरूरत है।