कहां मिले कितने नकद?
बीते एक दशक में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की सबसे बड़ी पांच बरामदगियों में 2023 में छत्तीसगढ़ और झारखंड में कोयला और अवैध खनन से जुड़े नेटवर्क पर छापों में 300 करोड़ रुपये नकद मिले। इसके अलावा, 2022 में पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले में शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के करीबी के ठिकानों से 50 करोड़ रुपये बरामद किए गए। 2021 में उत्तर प्रदेश में खनन घोटाले से जुड़े छापों में 40 करोड़ रुपये, 2020 में दिल्ली में हवाला नेटवर्क पर कार्रवाई में 35 करोड़ रुपये और 2024 में झारखंड में कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 30 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए।
ईडी की कार्रवाई की जद में सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री से लेकर वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारी भी आए। पिछले दस वर्षों में 150 से अधिक बार सांसदों, विधायकों और राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापे मारे गए, जबकि 80 से 100 वरिष्ठ आईएएस, आईपीएस और राज्य सेवा अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।
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आरबीआई में जमा होती है नकदी
ईडी के छापों में जब्त नकदी भारतीय रिजर्व बैंक में जमा कर दी जाती है। अगर अदालत मान लेती है कि रकम अपराध से अर्जित है, तो उसे सरकार के राजस्व में जोड़ दिया जाता है। जब तक अदालत का अंतिम आदेश नहीं आता, नकदी रिजर्व बैंक की कस्टडी में सुरक्षित रहती है।
2019 में ताकत बढ़ी तो कार्रवाई में तेजी
एनडीए सरकार ने वर्ष 2019 में धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) में बदलाव कर ईडी को आरोपियों के आवास पर छापे मारे, सर्च और गिरफ्तारी का अधिकार दे दिया। इसी के बाद से ईडी ने ताबड़तोड़ कार्रवाइयां शुरू की। पहले अन्य एजेंसियों की चार्जशीट में पीएमएलए की धाराएं लगाए जाने के बाद ही ईडी जांच करना शुरू करता था। अब ईडी खुद एफआईआर दर्ज कर सकती है और आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है।