मूडीज ने कहा कि, 'ये गिरावट कॉरपोरेट, छोटे एवं मझोले उद्योग और खुदरा खंड में होगी, और इसका असर बैंकों के मुनाफे और पूंजी पर पड़ेगा। हमने भारतीय बैंकिंग प्रणाली के परिदृश्य को स्थिर से बदलकर नकारात्मक कर दिया है। कोरोना वायरस महामारी से आर्थिक गतिविधियों के बाधित होने से भारत की आर्थिक वृद्धि में कमी होगी।'
बैंकों पर बढ़ेगा दबाव
आर्थिक गतिविधियों में तेज गिरावट और बेरोजगारी बढ़ने से आम आदमी और कॉरपोरेट की माली हालत खराब होगी, जिसके चलते बैंकों पर दबाव बढ़ेगा। इसमें कहा गया है कि गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में दिवालियापन के बढ़ते दबावों से बैंकों की परिसंपत्तियों की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी, क्योंकि बैंकों ने इन्हें काफी पैसा दे रखा है। मूडीज ने कहा है कि इससे मुनाफे और ऋण वृद्धि में कमी आने का अनुमान है।
मूडीज ने घटाया था वृद्धि दर का अनुमान
इससे पहले मूडीज ने कैलेंडर वर्ष 2020 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अपने पहले के अनुमान को घटा कर 2.5 फीसदी कर दिया था। वहीं पहले उसने इसके 5.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। कोरोना वायरस और उसके चलते देश दुनिया में आवागमन पर रोक के मद्देनजर आर्थिक लगत बढ़ी और इसी वहज से देश की वृद्धि दर घटने का अनुमान है। वर्ष 2019 में वृद्धि पांच फीसदी रहने का आकलन है। वैश्विक महामारी कोरोना से निपटने के लिए पूरे देश में 14 अप्रैल तक पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की गई है।