उद्योग संगठन सीआईआई ने शुक्रवार को कहा कि सामान्य बारिश तेल कीमतों में मामूली बढ़ोतरी की चिंताओं को दूर कर देगी। एक दिन पहले मौसम विज्ञान विभाग ने कहा था कि इस साल कमजोर मानसून की संभावना न के बराबर है।
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) के अध्यक्ष, नौशाद फोर्ब्स ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश और सरकार के सुधार प्रयासों के चलते यह उल्लेखनीय ग्रोथ हासिल हुई है। उन्होंने 2015-16 की 7.6 फीसदी जीडीपी ग्रोथ को बहुत ही वास्तविक बताया। फोर्ब्स ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को बहुत ज्यादा फायदा हुआ है। हर संकेत यही दर्शाता है कि तेल कीमतें बढ़ेंगी लेकिन इस साल इनमें नाटकीय रूप से बढ़ोतरी नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि सकारात्मक या सामान्य मानसून का प्रभाव अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ही फायदेमंद होगा और तेल कीमतों में मामूली मजबूती की चिंताओं को दूर करेगा। पिछले हफ्ते तेल कीमतें 50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थीं। इससे मुद्रास्फीति और ग्रोथ पर इसके लगातार बढ़ते प्रभाव की चिंताओं में बढ़ोतरी हो गई। फोर्ब्स ने कहा कि सामान्य मानसून का लाभ कृषि विकास में दिखाई देता है और अर्थव्यवस्था में मांग में बढ़ोतरी करता है। यह पूछे जाने पर कि इस हफ्ते जारी किए गए जीडीपी आंकड़ों में कितनी वास्तविकता थी, उन्होंने कहा कि आंकड़े बहुत ही वास्तविक थे। हमने देखा है कि ग्रोथ में महत्वपूर्ण रूप से बढ़ोतरी हुई है
सीआईआई अध्यक्ष ने कहा कि जीडीपी ग्रोथ आंकड़ों में 5-6 फीसदी के आसपास की मैन्यूफैक्चरिंग ग्रोथ बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है लेकिन ठीक-ठाक है। उन्होंने कहा कि मैन्यूफैक्चरिंग में निजी निवेश में अच्छी तेजी नहीं आई। पिछले 6 महीनों से ज्यादा से ज्यादा सेक्टर मांग में बढ़ोतरी की सूचना दे रहे हैं। सुधारों पर फोर्ब्स ने कहा कि अब भारत कई सालों के लिए मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में एफडीआई के लिए पूरी तरह से खुला है।