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Direct Tax: अमीरों को भरना पड़ सकता है ज्यादा कैपिटल गेन टैक्स, आय असमानता कम करने के लिए बदलाव की तैयारी

Wed, 19 Apr 2023 03:57 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

फिलहाल, देश में कमाई पर 30 फीसदी तक का कर लगता है। हालांकि, कुछ परिसंपत्ति वर्गों जैसे कि इक्विटी फंड और शेयर से कमाई पर कर की दरें काफी कम हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Istock
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विस्तार
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भारत सरकार प्रत्यक्ष कर कानूनों में आमूल-चूल बदलाव की तैयारी कर रही है, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर अगले साल सत्ता में लौटते हैं तो बढ़ती आय असमानता को कम करने में मदद कर सकें। इसके लिए अमीरों पर ज्यादा कैपिटल गेन टैक्स लगाने का फैसला लिया जा सकता है। भारत प्रत्यक्ष कर के बजाय अप्रत्यक्ष करों से होने वाली कमाई पर निर्भर है।

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देश में कमाई पर लगता है 30% तक टैक्स
फिलहाल, देश में कमाई पर 30 फीसदी तक का कर लगता है। हालांकि, कुछ परिसंपत्ति वर्गों जैसे कि इक्विटी फंड और शेयर से कमाई पर कर की दरें काफी कम हैं। सूत्रों ने कहा कि यह प्रगतिशील नहीं है और इक्विटी के सिद्धांत के खिलाफ है। इस सिद्धांत को 2024 में लागू करने के लिए 2019 में वित्त मंत्रालय को दिए गए प्रस्तावों के निर्माण के लिए एक पैनल की भी नियुक्ति हो सकती है।

हालांकि, इस पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है। आयकर विभाग ने कहा कि प्रत्यक्ष कर कानूनों में बदलाव का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। उधर, दुनियाभर के देश आय में भारी अंतर को कम करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। चीन और अमेरिका तक अमीरों पर उच्च कर लगाने संबंधी प्रस्ताव पहले ही कर चुके हैं। भारत में मोदी सरकार पर अक्सर आरोप लगते रहे हैं कि वह अमीरों के पक्ष में खड़ी रहती है। 
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बढ़ेगी टैक्स भरने वालों की संख्या
सरकार पिछले कुछ समय से लगातार देश में टैक्स भरने वालों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रही है। इसके लिए कई तरह के आंकड़ों को जुटाने का काम जारी है। हालांकि, अभी भी नई टैक्स व्यवस्था की तुलना में पुरानी कर व्यवस्था को ही लोग अपना रहे हैं।

2018 से 2022 के बीच हर दिन 70 नए करोड़पति
देश में 2018 और 2022 के बीच प्रत्येक दिन 70 नए करोड़पति बने। इसके बावजूद अर्थशास्त्री कहते हैं कि देश में गरीब व्यक्ति और ज्यादा गरीब होता जा रहा है। ऑक्सफैम इंटरनेशनल का अनुमान है भारत की शीर्ष 10 फीसदी आबादी के पास 77 फीसदी संपत्ति है। लगभग छह फीसदी लोग आयकर का भुगतान करते हैं।

चीन से आने वाली कंपनियों के लिए आसान व्यवस्था
अपने पहले कार्यकाल के दौरान नरेंद्र मोदी ने 2017 में कई अप्रत्यक्ष करों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के रूप में बदलकर भारत को एक टैक्स के दायरे में ला दिया। भारत सरकार वाशिंगटन और बीजिंग के बीच बढ़ते तनाव के बीच चीन से बाहर अपने परिचालन को स्थानांतरित करने की इच्छुक कंपनियों को आकर्षित करने के लिए जटिल कर प्रणाली को एक सरल कानून के रूप में बदलना चाह रही है। इसके लिए एक नया प्रत्यक्ष कर कोड लाने की तैयारी है।

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