मोदी सरकार ने भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने देश में मोबाइल और उसके कंपोनेंट बनाने वाली देसी कंपनियों के लिए 41 हजार करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पैकेज का एलान किया है। सरकार मेक इन इंडिया अभियान के तहत देसी मोबाइल कंपनियों को चार से छङ फीसदी का इंसेंटिव देगी। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट की मैन्यूफैक्चरिंग और मैन्यूफैक्चरिंग कलस्टर बनाने को प्रोत्साहन देने के लिए 7000 करोड़ रुपये देने का एलान किया है।
संचार, इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कैबिनेट की ओर से मंजूर यह योजना भारत को ग्लोबल मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में काफी अहम साबित होगी। प्रसाद ने कहा कि सरकार ने दो अहम कदम उठाए हैं। पहला कदम इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में उठाया गया है और दूसरा मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत बनाने की दिशा मेंष कैबिनेट ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव का भी फैसला किया है।
इसके तहत आने वाले पांच साल में मोबाइल फोन मैन्यूफैक्चरिंग और खास इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट निर्माण के लिए कंपनियों को प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव के लिए 40,995 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इनमें असेंबलिंग, टेस्टिंग मार्किंग और पैकेजिंग यूनिट्स भी शामिल हैं।
इस स्कीम से 2025 तक दस लाख करोड़ का रेवेन्यू देश को मिलेगा
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इंसेंटिव को कंपनियों की बिक्री में बढ़ोतरी और उनके पूंजी निवेश से जोड़ा जाएगाष उम्मीद है कि इससे 2025 तक दस लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू आएगा। मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के साथ ही कैबिनेट ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट और सेमी कंडक्टर के निर्माण को प्रोत्साहन देन के लिए 3,285 करोड़ रुपये का पैकेज मंजूर किया है। यह स्कीम पूंजीगत खर्चों पर 25 फीसदी का फाइनेंशियल इन्सेंटिव देगी। इस स्कीम से छह लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेंगे।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग कलस्टर के लिए कैबिनेट ने 3,762 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। यह राशि अगले आठ साल में खर्च की जाएगी। यह स्कीम प्रोजेक्ट लागत की 50 फीसदी तक वित्तीय मदद देगी। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर परियोजना की स्थापना के लिए प्रति 100 एकड़ भूमि पर 70 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।