मापतौल में गड़बड़ी की बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने मोबाइल लैब चलाने का फैसला लिया है, जिसे चरणबद्ध तरीके से देशभर में लागू किया जाएगा। इसमें उपभोक्ता अपनी सामग्री की घटतौली की जांच नजरों के सामने करा सकेगा। कमी पाए जाने पर वह तत्काल शिकायत के बाद विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई होगी। पहले चरण में 50 मोबाइल लैब चलाने के लिए बोलेरो गाड़ियों की खरीद जल्द की जाएगी।
उपभोक्ता मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, पहले चरण के लिए सात करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इसके लिए वाहन में बदलाव किए जाएंगे। वाहन के पिछले हिस्से को पूरी तरह खाली करके उसमें लैब से संबंधित उपकरण रखे जाएंगे। मंत्रालय को उपकरणों के साथ प्रति वाहन कुल लागत 15 से 20 लाख रुपये पड़ेगी।
राज्यों का लिया जाएगा सहयोग
मंत्रालय द्वारा राज्य सरकारों से इस बारे में चर्चा की गई है। पहले चरण की सफलता के बाद इसे राज्यों के सहयोग से चलाया जाएगा और मापतौल विभाग के अधिकारियों को मोबाइल लैब वाहन सौंपे जाएंगे। अभी तक मापतौल विभाग के अधिकारी नमूने लेकर उन्हें परीक्षण के लिए लैब भेजते हैं और रिपोर्ट आने के बाद कदम उठाया जाता है। मंत्रालय का मानना है कि एक जिले में तीन से पांच लैब के घूमने से मापतौल में गड़बड़ी की शिकायतों में कमी आएगी। साथ ही लोगों के जागरूक होने पर विक्रेता द्वारा मापतौल में गड़बड़ी करना पूरी तरह बंद हो जाएगा।
तत्काल होगी कार्रवाई
उपभोक्ता कानून के तहत उपभोक्ता को उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता, मात्रा, प्रभाव, शुद्धता, मानक तथा मूल्य के बारे में जानने का अधिकार है। अगर विक्रेता द्वारा अनुचित व्यापार पद्धति अपनाई जाती है, तो उसके खिलाफ इस कानून के तहत कार्रवाई का अधिकार भी उपभोक्ता को मिला हुआ है। मंत्रालय का कहना है कि मोबाइल लैब के जरिये उपभोक्ताओं को विक्रेता की अनुचित व्यापार पद्धति की जानकारी होगी और उसके खिलाफ कार्रवाई करने में भी आसानी होगी। उपभोक्ता आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल, मिट्टी के तेल सहित अन्य में घटतौली की जांच इस मोबाइल लैब द्वारा करा सकेंगे। इसके अलावा, किसी भी तरह के अनाज व खुली सामग्री की जांच के लिए मोबाइल लैब अपनी सेवाएं मुहैया कराएगा।
एक साल की सजा का प्रावधान
मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, घटतौली की सर्वाधिक शिकायतें बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से आ रही हैं। ऐसे में मंत्रालय पहले चरण में इन राज्यों में मोबाइल लैब चलाकर योजना की शुरुआत करेगा। गौरतलब है कि लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत मापतौल विभाग विक्रेता के खिलाफ घटतौली करने पर कानूनी कार्रवाई कर सकता है। घटतौली करने पर विक्रेता को एक वर्ष तक की सजा हो सकती है और दस हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।