उम्मीदों के अनुरूप अंतरिम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कर कानून में कोई बदलाव नहीं किया। हालांकि, उन आयकरदाताओं के लिए अच्छी खबर है, जिनका कर बकाया को लेकर कोई अनसुलझा विवाद है। वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2009-10 तक 25,000 रुपये तक और 2010-11 से 2014-15 तक 10,000 रुपये तक की बकाया प्रत्यक्ष कर मांगों को वापस लेने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम से करीब एक करोड़ करदाताओं को फायदा होने की उम्मीद है।
इसी तरह, पिछले पांच वर्षों में फेसलेस आकलन और अपील की शुरुआत के साथ आयकर विभाग की ओर से दी जाने वाली सेवाओं में सुधार हुआ है। नए फॉर्म 26एएस और कर रिटर्न की प्रीफिलिंग ने कर रिटर्न दाखिल करना सरल और आसान बना दिया है। इसके चलते ज्यादातर मामलों में रिटर्न की औसत प्रक्रिया का समय घटकर 10 दिन हो गया है। इसका मतलब है कि कर रिफंड पर भी तेजी से ध्यान दिया जा रहा है। पुरानी आयकर व्यवस्था खत्म होने वाली नहीं है। हालांकि, इसके साथ बने रहने को लेकर लोगों में उत्साह कम हो रहा है। इसके अलावा, नई कर व्यवस्था के तहत 7 लाख रुपये तक की आय वाले करदाताओं के लिए कोई कर देनदारी नहीं है। यह नए करदाताओं के लिए अधिक आकर्षक बनाती है।
आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए सक्षम हो रहे लोग
मध्य वर्ग के लिए बचाया गया हर रुपया बहुत काम आता है। अपने भाषण में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जिक्र किया कि लोगों की औसत वास्तविक आय में 50 फीसदी की वृद्धि हुई है और महंगाई में नरमी आई है। इसके मायने हैं कि लोग अपनी आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए सशक्त, सुसज्जित और सक्षम हो रहे हैं। कई विकास संबंधी घोषणाओं और चल रही परियोजनाओं के साथ इस बजट से मध्य वर्ग और करदाताओं को बहुत कुछ लाभ होने की उम्मीद है।