पीएम मोदी ने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। उन्होंने गुजरात के साणंद में माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग (ATMP) सुविधा का उद्घाटन करते हुए इसे देश की तकनीकी नेतृत्व यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एआई क्रांति का दौर है और सेमीकंडक्टर इस क्रांति का प्रमुख आधार है। उन्होंने जोर दिया कि इस ATMP सुविधा में व्यावसायिक उत्पादन की शुरुआत से वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।
मोदी ने भारत-अमेरिका सहयोग को भी अहम बताते हुए कहा कि एआई और चिप्स जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि दुनिया इन दोनों महत्वपूर्ण तकनीकों की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की दिशा में प्रयास कर रही है और भारत व अमेरिका इस दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान जब वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई थी, उसी समय भारत ने सेमीकंडक्टर परियोजनाओं की नींव रखी थी, जिसका परिणाम अब सामने आ रहा है और देश तकनीकी क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
माइक्रॉन टेक्नोलॉजी के सीईओ संजय मेहरोत्रा ने कंपनी की नई सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्ट और पैकेजिंग (ATMP) इकाई के उद्घाटन पर बताया कि यह प्लांट हर साल सैकड़ों मिलियन चिप्स का उत्पादन करेगा। उन्होंने कहा कि यह सुविधा माइक्रॉन के वैश्विक नेटवर्क से आने वाले उन्नत DRAM और NAND वेफर्स को तैयार चिप्स में बदलकर दुनियाभर के ग्राहकों तक पहुंचाएगी।
मेहरोत्रा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए डेटा जरूरी है और डेटा के लिए मेमोरी और स्टोरेज की अहम भूमिका होती है, जिसे माइक्रॉन विकसित करता है। उन्होंने यह भी बताया कि संयंत्र ने अब तक 2.3 करोड़ कार्य घंटे पूरे किए हैं और यहां 100% जल पुन: उपयोग जैसे सतत उपाय अपनाए गए हैं।
उन्होंने भारत को माइक्रॉन के लिए एक उभरता हुआ वैश्विक केंद्र बताते हुए कहा कि 2019 के बाद से कंपनी ने यहां R&D से लेकर पूर्ण विनिर्माण तक विस्तार किया है। वर्तमान में भारत में माइक्रॉन की टीम करीब 6,000 सदस्यों की हो चुकी है, जो गामा DRAM और जनरेशन-नाइन NAND जैसी उन्नत मेमोरी तकनीकों के डिजाइन में योगदान दे रही है। कंपनी के अनुसार भारत में 300 से अधिक आविष्कारकों के पास पेटेंट हैं और स्थानीय टीम द्वारा 2,500 से ज्यादा पेटेंट व डिस्क्लोजर दाखिल किए जा चुके हैं।