अफ्रीकी स्वाइन फ्लू और कोरोना वायरस महामारी की वजह से मौजूदा समय में मीट का उत्पादन काफी प्रभावित हुआ है। लिकेन ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डवलपमेंट (ओईसीडी) और यूएन के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (एफएओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसका असर ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगा। आगामी 10 सालों में मीट इंडस्ट्री की तेजी से वृद्धि होगी। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2029 तक वैश्विक मीट उत्पादन 12 फीसदी बढ़ जाएगा।
दरअसल ब्राजील और चीन जैसे कुछ देशों ने मीट का आउटपुट बढ़ा दिया है, जिसकी वजह से यह वृद्धि आएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ्रीका के स्वाइन फ्लू और कोरोना वायरस महामारी की वजह से अभी मीट का उत्पादन अपने निचले स्तर पर है। हालांकि आने वाले सालों में इसमें रिकवरी आएगी।
2029 तक वैश्विक स्तर पर मीट की खपत का 1,450 लाख टन तक बढ़ने का अनुमान है। इस दौरान पोर्क की खपत 1,270 लाख टन तक बढ़ जाएगी, जो मीट की कुल खपत का 28 फीसदी है। बीफ की खपत साल 2029 तक 760 लाख टन तक बढ़ने की उम्मीद है। वहीं मटन की खपत 20 लाख टन तक बढ़ सकती है।
ओईसीडी और एफएओ के अनुमान के अनुसार, साल 2019 में मीट की खपत 3,250 लाख टन रही, जो इससे पिछले साल के मुकाबले दो फीसदी कम है। अफ्रीकी स्वाइन फीवर के चलते इसमें गिरावट दर्ज की गई। वहीं चीन में पिछले साल पोर्क का उत्पादन 21 फीसदी कम हुआ और कुल मीट उत्पादन में 10 फीसदी की कमी आई।
एक्वाकल्चर की बात करें, तो रिपोर्ट के अनुसार, आगामी वर्षों में मछली का उत्पादन बढ़ेगा। मौजूगदा समय में मछली का उत्पादन 1,760 लाख टन है। वहीं 2029 तक यह 2,000 लाख टन पर पहुंचने का अनुमान है।