चिप्स और वेफर्स की लोकप्रियता बरकरार
हालांकि नए प्रारूप लोकप्रिय हो रहे हैं, लेकिन चिप्स और वेफर्स जैसे पारंपरिक विकल्प अभी भी बरकरार हैं। 14 प्रतिशत लोग इन्हें चुनते हैं, इसके बाद 10 प्रतिशत नमकीन और 9 प्रतिशत लोग खाखरा जैसे मल्टीग्रेन स्नैक्स चुनते हैं। मीठे स्नैक्स भी विकसित हो रहे हैं, जबकि चॉकलेट भारत में हमेशा से पसंदीदा रहा है,। मूंगफली का मक्खन, हेजलनट और पिस्ता जैसे मेवे अब स्वाद और स्वास्थ्य के मिश्रण के कारण पसंद किए जा रहे हैं।
ब्रांड लॉयल्टी में हो रहा बदलाव
ब्रांड लॉयल्टी, जो पहले पारंपरिक बड़ी कंपनियों तक सीमित थी, अब कई प्लेटफॉर्म्स पर फैल रही है। जहां एक ओर ऑफलाइन स्टोर अब भी योजनाबद्ध खरीदारी और खोज का प्रमुख जरिया बने हुए हैं, वहीं क्विक कॉमर्स और इन्फ्लुएंसर-चालित कंटेंट की बदौलत अचानक स्नैकिंग की आदतों में तेजी आई है। खासतौर पर जेनरेशन जेड और मिलेनियल्स उपभोक्ताओं में यह प्रवृत्ति अधिक देखी जा रही है। यह पैकेज्ड स्नैक्स को साप्ताहिक रूप से पुराने उपभोक्ताओं की तुलना में दोगुनी दर (43 प्रतिशत बनाम 28 प्रतिशत) पर ऑर्डर करते हैं।
सांस्कृतिक बदलाव का संकेत
इस बीच, टियर 2 और टियर 3 शहर क्षेत्रीय खिलाड़ियों को तेजी से अपना रहे हैं। यह राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन की ताकत न होने के बावजूद, निरंतर गुणवत्ता और सामुदायिक उपस्थिति के जरिए गहरा विश्वास हासिल करते हैं। यह एक व्यापक सांस्कृतिक बदलाव का संकेत देता है जहां पारदर्शिता, विश्वसनीयता और स्थानीय जुड़ाव, स्वाद और मार्केटिंग पहुंच जितना ही महत्वपूर्ण हैं।