फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ED: भारत-म्यांमार ड्रग रैकेट केस में बड़ा खुलासा, भारतीयों के जीएसटी विवरण का पड़ोसी देश में हुआ गलत इस्तेमाल

Sat, 29 Nov 2025 02:31 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ईडी की जांच में भारत-म्यांमार ड्रग्स तस्करी रैकेट का बड़ा खुलासा हुआ है। म्यांमार के नागरिक भारतीयों के जीएसटी प्रमाण पत्रों का दुरुपयोग कर मेथामफेटामिन बनाने में उपयोग होने वाले रसायन सूडोइफेड्रिन और कैफीन एन्हाइड्रस खरीद रहे थे। यह पूरी सप्लाई चेन भारत-म्यांमार की पोरस सीमा, खासकर मिजोरम, के जरिए संचालित हो रही थी और कई राज्यों तक इसके वित्तीय व तस्करी नेटवर्क फैले थे।
विज्ञापन
ED - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

क्रॉस-बॉर्डर नारकोटिक्स तस्करी की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। ईडी ने बताया कि म्यांमार मूल के लोगों ने भारतीय नागरिकों के जीएसटी प्रमाण पत्रों का दुरुपयोग कर ड्रग्स बनाने के लिए जरूरी कच्चा माल खरीदा। 

विज्ञापन


ये भी पढ़ें: Nikhil Kamath: निखिल कामथ और एलन मस्क एक साथ; WTF का टीजर हुआ शेयर, फैंस बोले- ये असली है या AI

भारत-म्यांमार सीमा पर ली गई पहली बार तलाशी

यह खुलासा एजेंसी की उस कार्रवाई के दौरान सामने आया है, जब ड्रग्स तस्करी से जुड़े धन शोधन मामले में भारत-म्यांमार सीमा पर पहली बार तलाशी ली गई थी।
ईडी ने 27 नवंबर को अपनी इस विशेष कार्रवाई के तहत मिजोरम के आइजोल और चंपाई (भारत-म्यांमार बॉर्डर) में कई ठिकानों पर छापेमारी की। इसके अलावा असम के करीमगंज जिले के श्रीभूमि क्षेत्र और गुजरात के अहमदाबाद में भी तलाशी ली गई।

जांच में क्या आया सामने?

तलाशी के दौरान जुटाए गए सबूतों से पता चला है कि भारतीय नागरिकों ने म्यांमार के लोगों के लिए सूडोइफेड्रिन टैबलेट और कैफीन एन्हाइड्रस खरीदे। इन रसायनों का उपयोग सीमापार मेथामफेटामिन जैसी सिंथेटिक ड्रग्स के उत्पादन में किया जाता है।

ड्रग्स तस्करी के अलावा अवैध वित्तीय लेनदेन और धन शोधन का भी आरोप

एजेंसी के अनुसार, यह नेटवर्क न केवल ड्रग्स की तस्करी में शामिल था, बल्कि अवैध वित्तीय लेनदेन और धन शोधन के जरिए इसकी कमाई को भी छिपाया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि म्यांमार नागरिकों ने भारतीय नागरिकों के जीएसटी क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग कर ड्रग निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे पदार्थों की खरीद को वैध दिखाया।

विज्ञापन


एजेंसी के अनुसार, इस योजना ने मादक पदार्थों के विनिर्माण की आपूर्ति शृंखला को बढ़ावा दिया, भारत-म्यांमार की पोरस यानी बेहद संवेदनशील और खुली सीमा वाले इलाकों जैसे मिजोरम को प्रभावित कर रही थी। इसमें कई भारतीय राज्यों तक वित्तीय और तस्करी के संबंध थे और इन गतिविधियों के माध्यम से धन शोधन किया गया।

46.7 लाख रुपये जब्त और 21 बैंक खातों को किया गया फ्रीज

छापेमारी के दौरान कुछ हवाला संचालकों और अन्य लोगों से 46.7 लाख रुपये की नकदी जब्त की गई व एजेंसी ने 21 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया। ईडी का मामला मिजोरम पुलिस की एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें छह लोगों से 1.41 करोड़ रुपये मूल्य की 4.72 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी।

विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें