देश में सेमीकंडक्टर बनाने और इससे जुड़े घरेलू उद्योग के विकास के लिए केंद्र सरकार के मजबूत प्रयासों से आयातित चिप पर भारत की निर्भरता में कमी आएगी। इसके परिणामस्वरूप देश को 10-20 अरब डॉलर की बचत होगी।
विशाल प्रतिभा व स्टार्टअप तंत्र से मिल रहा समर्थन
मैकेंजी ने कहा, सेमीकंडक्टर डिजाइन में भारत मजबूती से आगे बढ़ रहा है। इसे विशाल प्रतिभा पूल और बढ़ते स्टार्टअप तंत्र का समर्थन मिल रहा है, जो देश को दुनिया के शीर्ष तीन डिजाइन केंद्रों में से एक बनाता है। हालांकि, बड़े पैमाने पर सेमीकंडक्टर बनाने के लिए भारत को सतत प्रक्रिया अपनानी होगी और कुछ आवश्यक बदलाव भी करने होंगे।
चिप निर्माण की राह में कुछ चुनौतियां भी
रिपोर्ट में सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार को लेकर कुछ आवश्यक चुनौतियों का भी जिक्र किया गया है। इन चुनौतियों में अधिक पूंजी की जरूरतें, उन्नत विनिर्माण तकनीकों तक सीमित पहुंच और घरेलू आपूर्ति शृंखला में कमियां शामिल हैं। घरेलू आपूर्ति शृंखला की कमियों को दूर करने के लिए विशेष रूप से उच्च शुद्धता वाली गैसों, विशिष्ट रसायनों और अतिशुद्ध जल के मोर्चे पर काम करना होगा।
15 लाख कुशल श्रमबल की जरूरत
हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत को 2026-27 तक मूल्य शृंखला में करीब 15 लाख कुशल और 50 लाख अर्धकुशल श्रमबल की जरूरत होगी। प्रसंस्करण, उपकरण इंजीनियर, आईसी परीक्षण इंजीनियर और क्षमता नियोजन प्रबंधक जैसी भूमिकाओं की उच्च मांग की उम्मीद है। दो से पांच वर्षों में डिजाइन, विनिर्माण, प्रशिक्षण, आपूर्ति शृंखला प्रबंधन, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स में रोजगार के अनेक अवसर उपलब्ध होंगे।