कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया के काम करने के तरीके को बदल दिया है। इस दौरान सभी कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम को तवज्जो दी। काम के प्रति कर्मचारियों की घारणा भी बदली है। कोरोना काल में कर्मचारियों की अपनी कंपनी के प्रति निष्ठा बढ़ी है।
ऐसा इसलिए क्योंकि आईटी क्षेत्र के कर्मचारियों में कम समय में नौकरी बदलने का रुख बदला है। कर्मचारी अब जॉब सिक्योरिटी को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। देश की प्रमुख आईटी कंपनियों के एचआर के आंकड़ों से इस बात की पुष्टि की है कि महामारी ने अपनी नौकरी के प्रति कर्मचारियों की धारणा में परिवर्तन आया है।
टीसीएस में नौकरी छोड़ने की दर सबसे कम
31 दिसंबर 2020 को समाप्त हुई चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान आईटी कंपनियों में नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों की दर सबसे कम रही है। भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में नौकरी छोड़ने की दर अभी तक की सबसे कम रही है। टीसीएस के बाद देश की तीसरी और चौथी बड़ी सबसे बड़ी आईटी कंपनी, एचसीएल टेक और विप्रो का क्रम रहा। इन दोनों कंपनियों में कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर तीन साल में सबसे कम रही।
सितंबर तिमाही की बात करें, तो तब टीसीएस में यह दर 8.9 फीसदी थी, जो अब दिसंबर तिमाही में कम होकर 7.6 फीसदी हो गई है। एचसीएल टेक में यह आंकड़ा 12.2 फीसदी से कम होकर 10.2 फीसदी पर आ गया है। वहीं विप्रो में यह दर 11 फीसदी पर स्थिर है। बात अगर भारत की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस की करें, तो यहां कर्मचारियों के नौकरी छोड़कर जाने की दर सितंबर तिमाही की तुलना में दिसंबर तिमाही के दौरान थोड़ी बढ़कर 10 फीसदी पर पहुंच गई है।
इस संदर्भ में इंफोसिस के सीओओ प्रवीण राव ने कहा कि उनकी कंपनी में कर्मचारियों की स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने का आंकड़ा कम होकर 10 फीसदी पर आ गया है, जो उनके कंफर्ट बैंड यानी 14 से 15 फीसदी से कम है। वहीं रिसर्चर फर्म एवरेस्ट समूह के वाइस प्रेसिडेंट युगल जोशी ने कहा कि, अनिश्चितता के इस दौर में कर्मचारी अपनी वर्तमान नौकरी या नियोक्ता को नहीं छोड़ना चाहते हैं।