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क्या है E-Cigarette और भारत में कितना है इसका कारोबार, जानें सभी सवालों के जवाब

Sat, 21 Sep 2019 11:47 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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निर्मला सीतारमण
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भारत में सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट ( E-Cigarette ) पर बैन लगा दिया है। इसके साथ ही केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने ई-सिगरेट की सेल, उत्पादन, निर्यात, ट्रांसपोर्ट, आयात, स्टोरेज और विज्ञापन पर भी रोक लगाई है। 

क्या होती है ई-सिगरेट ?

सबसे पहले जानना होगा कि ई-सिगरेट क्या होती है। ई-सिगरेट एक खास प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक गैजेट है, जिसको बैटरी के जरिए चलाया जाता है। लोग इस डिवाइस के माध्यम से बिना तंबाकू के पदार्थों को इनहेल ( Inhale ) करते हैं। इस गैजेट को साधारण सिगरेट और तंबाकू के बदले इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, ये डिवाइस अपने उपभोक्ताओं को तंबाकू और ई-सिगरेट के स्वाद जैसा महसूस कराते हैं। इस गैजेट का आकार और रूप असली सिगरेट की तरह होता है। 

ई सिगरेट का है 1500 करोड़ रुपये का ब्लैक मार्केट

लंबे समय से ई सिगरेट पर काम कर रहे स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ निदेशक ने हाल ही में इसके हर छोटे बड़े पहलू पर अमर उजाला से बातचीत की थी। इनके अनुसार करीब 460 ई सिगरेट की कंपनियां देश में एक्टिव हैं। इनके करीब सात हजार से ज्यादा फ्लेवर उत्पाद बाजारों में बिक रहे हैं जिनका कारोबार करीब 800 करोड़ रुपये के आस-पास है, लेकिन इसका ब्लैक मार्केट करीब दोगुना यानी 1500 करोड़ रुपये का है। चीन, कोरिया, जापान और दुबई जैसे देशों से सीधे मुंबई, दिल्ली व गुजरात के रास्ते ई सिगरेट के उत्पादों को बाजारों तक लाया जा रहा है। चूंकि अभी तक कानून नहीं था, इसलिए दुकानों पर खुलेआम इसकी बिक्री होती थी। स्कूली बच्चों से लेकर 20 से 25 वर्ष तक की आयु के युवा अक्सर ई सिगरेट के साथ दिखते भी हैं।

कैसे आई ई-सिगरेट ?

2003 में चीनी फार्मासिस्ट होन लिक ने इसे बनाया था, जिसके बाद चीन की ही कंपनी गोल्डन ड्रैगन ने बाकी देशों में इसकी बिक्री शुरू कर दी। भारत में ई-सिगरेट नाथुला-पास, नेपाल समेत अन्य व्यापारिक रूटों से आया। बाद में भारतीय कारोबारी इसे चीन से आयात भी करने लगे। ग्रे मार्केट से इसकी बड़े पैमाने पर आपूर्ति होती है। वहीं अब ई-हुक्का भी बाजार में है और हुक्के का इस्तेमाल करने वालों को गुड़गुड़ाट के साथ हुक्का पीने का भी एहसास होता है। 

तंबाकू और सिगरेट से भी ज्यादा हानिकारक है ई-सिगरेट

दरअसल ई-सिगरेट तंबाकू और सिगरेट से ज्यादा हानिकारक है। ई-सिगरेट लोगों के स्वास्थ्य को भी बहुत नुकसान पहुंचाती हैं। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर क्यों मोदी सरकार ने ई-सिगरेट और इसके उत्पादन पर प्रतिबंध लगाया है और कैसे ई-सिगरेट हमारे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालती है। 

स्वास्थ्य को पहुंचाता है बहुत नुकसान 

ई-सिगरेट को लेकर आईसीएमआर ने रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, ई-सिगरेट लोगों के डीएनए को बहुत नुकसान पहुंचाती हैं। इसके साथ ही लोगों को ब्रीथ, फेफड़े समेत हार्ट की गंभीर बीमारियां होती हैं। वहीं, जो महिलाएं ई-सिगरेट या ई-हुक्के का सेवन करती हैं, उनको प्रेगनेंसी से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी तरफ विशेषज्ञों की मानें तो इस तरह के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से लोग तंबाकू का सेवन करने लगेंगे। इस वजह से सरकार ने इस तरह के प्रोडक्ट्स पर बैन लगा दिया है। 

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ई-सिगरेट पर बैन के लिए अध्यादेश जारी

सरकार ने ई-सिगरेट को प्रतिबंधित करने के लिए एक अध्यादेश भी जारी कर दिया है। इसका उल्लंघन करने वाले को जेल की सजा हो सकती है और जुर्माना लग सकता है।

पांच लाख तक का लग सकता है जुर्माना

अध्यादेश के अनुसार, पहली बार इसका उल्लंघन करने वालों को एक साल तक की सजा होगी और एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा। इस प्रतिबंध का लगातार उल्लंघन करने वालों को तीन साल तक की सजा हो सकती है या पांच लाख रुपये का जुर्माना भी हो सकता है या दोनों सजाएं साथ हो सकती हैं।

न्यूयॉर्क में भी लगाया गया फ्लेवर्ड ई-सिगरेट पर प्रतिबंध

दुनियाभर में फ्लेवर्ड वाली ई-सिगरेट के बढ़ते चलने के बाद इसके नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए हाल ही में न्यूयॉर्क सिटी में भी इस पर बैन लगाया गया था। न्यूयॉर्क ई-सिगरेट पर बैन लगाने वाला दूसरा स्टेट बना गया है। न्यूयॉर्क के डोमेस्टिक गवर्नर ने टीनएजर्स और यूथ के बीच इस सिगरेट से बढ़ रही फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों की बढ़ती संख्या पर चिंता जाहिर करते हुए इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। जिसके बाद इस पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया।

एंड्रयू क्वोमो के कार्यालय की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि पैनल ने ई सिगरेट पर बैन के लिए मतदान के बाद मेन्थॉल के अलावा सभी फ्लेवर्ड ई-सिगरेट पर लागू कर दिया है। इस नियम के बाद ई-सिगरेट बेचने वाले रिटेलर्स को दो सप्ताह का समय दिया गया है।

यूएस के मिशिगन में भी बैन है ई-सिगरेट

यूनाइटेड स्टेड में मिशिगन के बाद न्यूयॉर्क सिटी दूसरा ऐसा राज्य बन चुका है, जहां फ्लेवर्ड ई-सिगरेट पर बैन लगाया जा चुका है। बैन के निर्णय के बाद एंड्रयू क्वोमो ने कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि ई-सिगरेट उपलब्ध कराने वाली कंपननियां जानबूझकर बबलगम, कैप्टन क्रंच और कॉटन कैंडी जैसे फ्लेवर का उपयोग कर रही हैं ताकि युवाओं को इसकी ओर आकर्षित किया जा सके। यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का विषय है और आज यह समाप्त होता है।
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