एक व्यापारिक संगठन ने दावा किया है कि पिछले तीन महीनों में कश्मीरी व्यापारियों को 10,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का नुकसान हुआ है। वहीं अगस्त में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति व राज्य के पुनर्गठन के बाद से व्यापारियों को ज्यादा घाटा उठाना पड़ा, जिसकी वजह से अब तक व्यावसायिक समुदाय को 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है।
अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद लगी पाबंदियां
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पांच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को निष्प्रभावी कर दिया था। अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद सुरक्षा कारणों के चलते वहां कई पाबंदियों लगाई गईं थी।
तमाम क्षेत्रों को हुआ नुकसान
सुरक्षा के मद्देनजर कश्मीर में जो पाबंदियां लगाई गईं थी, उसकी वजह से वहां के मुख्य बाजार लंबे समय तक बंद रहे और सार्वजनिक परिवहन भी सड़कों से नदारद रहा। इस संदर्भ में व्यापारिक संगठन कश्मीर वाणिज्य एवं उद्योग मंडल ( KCCI ) के अध्यक्ष शेख आशिक ने कहा है कि, 'कश्मीर में अब तक कुल कारोबारी नुकसान 10,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है। इससे तमाम क्षेत्रों को नुकसान उठाना पड़ा है।
ये है नुकसान की वजह
आगे उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सप्ताहों में कुछ बाजार खुले थे, जिसके बाद कारोबार शुरू किया गया था, लेकिन सूचना के अनुसार, कामकाज काफी सुस्त रहा। शेख आशिक ने कहा है कि इस कारोबारी नुकसान की मुख्य वजह इंटरनेट सेवाओं का निलंबित रहना है। इसकी वजह से करीब 50 हजार बुनकरों और दस्तकारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। इसके अतिरिक्त रोजगार पर भी असर पड़ा है।
कम हुआ सेब का निर्यात
इस साल नौ अक्तूबर तक जम्मू-कश्मीर के किसानों ने 4.5 लाख टन सेब का निर्यात किया है। 4.5 लाख टन सेब का निर्यात पिछले साल 2018 की समान अवधि से करीब सवा लाख टन कम है। सेब के अतिरिक्त कश्मीर में अखरोट का भी उत्पादन होता है। देश में करीब 90 फीसदी अखरोट और गिरी का उत्पादन कश्मीर में ही होता है।