केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक को अभूतपूर्व सुधार बताते हुए कहा कि इस पैमाने पर बदलाव का उदाहरण न तो भारत में पहले देखा गया है और न ही दुनिया में कहीं और। उन्होंने बताया कि एक साथ 79 संसदीय अधिनियमों के करीब 1,000 प्रावधानों में संशोधन किया गया है, जिनमें आजादी के पहले के छह कानून भी शामिल हैं।
संसद ने गुरुवार को जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। इस विधेयक के जरिए केंद्र सरकार ने विभिन्न कानूनों में मौजूद कई आपराधिक प्रावधानों को खत्म कर उन्हें सरल और तर्कसंगत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसका उद्देश्य कारोबार सुगमता और आम लोगों के जीवन को आसान बनाना है।
विधेयक की प्रमुख विशेषता यह है कि कई छोटे अपराधों में जेल की सजा को हटाकर मौद्रिक दंड (पेनल्टी) का प्रावधान किया गया है। सरकार पहले ही 183 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर चुकी है। नए कानून के तहत मामूली उल्लंघनों पर चेतावनी, सुधार नोटिस या जुर्माना लगाया जाएगा, जिससे अदालतों पर बोझ भी कम होगा।
गोयल ने बताया कि देश में ऐसे प्रावधानों के तहत पांच करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें अधिकांश मामूली उल्लंघन से जुड़े हैं। अब अधिकारियों को सीधे पेनल्टी लगाने का अधिकार मिलेगा, जिससे लंबी न्यायिक प्रक्रिया से बचा जा सकेगा।
विधेयक में चरणबद्ध कार्रवाई (ग्रेडेड एनफोर्समेंट) का प्रावधान है पहले सलाह, फिर चेतावनी और दोहराव पर बढ़ती पेनल्टी। हालांकि, गंभीर अपराधों को इसमें शामिल नहीं किया गया है और उनके लिए कड़े प्रावधान पहले जैसे ही रहेंगे।
गोयल ने कहा कि यह सुधार औपनिवेशिक मानसिकता वाले कानूनों से आगे बढ़ने का प्रयास है, जहां दंड को प्राथमिकता दी जाती थी। अब सरकार का फोकस भरोसे पर आधारित शासन पर है, जिसमें ईमानदार नागरिकों और व्यवसायों को अनावश्यक कानूनी दबाव से राहत मिलेगी।
विधेयक के तहत विभिन्न कानूनों में जुर्माने की राशि संशोधित की गई है और हर तीन साल में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान जोड़ा गया है। साथ ही, विवादों के निपटारे के लिए निर्णायक और अपीलीय प्राधिकरण बनाए जाएंगे। कुछ मामूली अपराधों जैसे झूठा फायर अलार्म या जन्म-मृत्यु की सूचना न देना को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे निवेश, व्यापार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।
उद्योग संगठन सीआईआई ने इस विधेयक का स्वागत किया है। CII ने कहा कि इस कानून के लागू होने के बाद कारोबारियों के लिए अनुपालन (कॉम्प्लायंस) का बोझ काफी कम होगा और व्यापार करने में आसानी बढ़ेगी। संगठन के अनुसार, इससे विवादों के निपटारे की प्रक्रिया भी तेज होगी, जिससे उद्योगों को राहत मिलेगी। संगठन का मानना है कि यह कदम निवेशकों के भरोसे को मजबूत करेगा और देश में निवेश के माहौल को और बेहतर बनाने में मददगार साबित होगा।