बीते साल कई नए देशों ने जम्मू-कश्मीर के हैंडीक्राफ्ट में रुचि दिखाई थी। इसमें कुशन, कालीन समेत पेपर मैशे के उत्पाद भी शामिल थे। स्विट्जरलैंड, इंगलैंड, दुबई सभी जगह के लिए हैंडीक्राफ्ट का बेहतरीन एक्सपोर्ट कारोबार रहा। इस बार भी आर्डर की कॉल कम नहीं, लेकिन दिक्कत यह कि रजिस्ट्रेशन नंबर न होने से कारोबार नहीं हो पा रहा।
सबसे ज्यादा डिमांड कारपेट की
सबसे ज्यादा डिमांड कारपेट की रहती है। करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट इसी का है। इसके बाद शाल, पेपर मैशे और वुड कार्विंग का स्थान आता है। कापर वेयर और सिल्वर वेयर का भी एक्सपोर्ट होता है।