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GST Reforms: स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसियों के कमीशन-ब्रोकरेज पर ITC का लाभ बंद, CBIC ने दी जानकारी

Tue, 16 Sep 2025 05:31 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सीबीआईसी ने बताया कि 22 सितंबर से बीमा कंपनियां व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसियों पर दिए जाने वाले कमीशन और ब्रोकरेज जैसे इनपुट पर चुकाए गए जीएसटी का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) अब नहीं ले पाएंगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि होटल उद्योग, ब्यूटी और वेलनेस सेक्टर जैसे क्षेत्रों में भी जहां पांच प्रतिशत बिना ITC की दर लागू है, वहां इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं मिलेगा।
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जीवन बीमा - फोटो : i stock
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विस्तार
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बीमा कंपनियों को 22 सितंबर से बड़ा झटका लगने वाला है। व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसियों पर दिए जाने वाले कमीशन और ब्रोकरेज जैसे इनपुट पर चुकाए गए जीएसटी का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) अब कंपनियां नहीं ले पाएंगी। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने मंगलावर को यह जानकारी दी।

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3 सितंबर को हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसियों के प्रीमियम को मौजूदा 18% से घटाकर पूरी तरह जीएसटी-मुक्त करने का निर्णय लिया गया था।

रिइंश्योरेंस सेवाओं पर छूट जारी रहेगी

सीबीआईसी ने कहा कि अभी तक बीमा कंपनियां कमीशन, ब्रोकरेज और रिइंश्योरेंस (पुनर्बीमा) जैसी इनपुट सेवाओं पर आईटीसी का लाभ ले रही थीं। नए नियमों के तहत केवल रीइंश्योरेंस सेवाओं पर छूट जारी रहेगी, जबकि बाकी इनपुट सेवाओं पर दिया गया जीएसटी कंपनियों की लागत बन जाएगा।

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सेवा क्षेत्रों में आईटीसी का लाभ नहीं मिलेगा

यह भी स्पष्ट किया गया कि होटल उद्योग, ब्यूटी और वेलनेस सेक्टर जैसे क्षेत्रों में भी जहां पांच प्रतिशत बिना ITC की दर लागू है, वहां इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य ग्राहकों तक कम दरों का सीधा लाभ पहुंचाना है। इसलिए दोहरी दर संरचना की अनुमति नहीं दी गई है।

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एएमआरजी एंड एसोसिएट्स  के सीनियर पार्टनर राजत मोहन ने कहा कि जब जीएसटी कानून 5% की रियायती दर "बिना ITC" पर तय करता है, तो यह व्यावहारिक रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नकार देता है और ऐसी सप्लाई को छूट वाली सेवाओं के समान मान लिया जाता है।

उपभोक्ताओं पर कर का बोझ घटाना उद्देश्य 

उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य अनुपालन को सरल बनाना और अंतिम उपभोक्ताओं पर कर का बोझ घटाना है। लेकिन इसकी कीमत सेवा प्रदाताओं को चुकानी पड़ती है, क्योंकि उन्हें इनपुट चेन में एम्बेडेड जीएसटी की लागत वहन करनी होती है। इसके चलते सावधानीपूर्वक ITC के विभाजन और प्रत्यावर्तन की आवश्यकता होती है।


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