पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ / आईएमएफ
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आने वाले हफ्ते में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की अहम मीटिंग से ठीक पहले पाकिस्तान ने भारत के उस एलान को राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया है, जिसमें भारत ने आईएमएफ से पाकिस्तान के कर्ज और फंडिंग की समीक्षा की मांग करने की बात कही थी। वहीं एक पाकिस्तान अखबार ने सरकारी अफसरों के हवाले से कहा कि भारत का यह फैसला पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की उसकी मुहिम का हिस्सा है। पाकिस्तान का कहना है कि भारत जानबूझकर आईएमएफ जैसे वैश्विक संस्थानों को इसमें घसीट रहा है ताकि पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़े।
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आईएमएफ की मीटिंग अगले हफ्ते
आईएमएफ का कार्यकारी बोर्ड नौ मई को पाकिस्तान के अधिकारियों से मुलाकात करेगा। इसमें पाकिस्तान के लिए 7 अरब डॉलर के विस्तारित वित्तपोषण सुविधा (ईएफएफ) की समीक्षा होगी और एक नई योजना के तहत लचीलापन और स्थिरता सुविधा में मदद की बात होगी।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत का रुख सख्त
भारत ने शुक्रवार को कहा कि वह आईएमएफ समेत सभी वैश्विक वित्तीय संस्थाओं से पाकिस्तान को दिए जा रहे कर्ज और मदद की दोबारा जांच करने का अनुरोध करेगा। भारत का यह कदम 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद आया है, जिसमें 26 निर्दोष पर्यटकों की मौत हो गई थी। भारत ने आरोप लगाया कि इस हमले में शामिल पांच आतंकियों में से तीन पाकिस्तानी नागरिक हैं। वहीं, पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है।
पीएम मोदी का कड़ा संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल को सख्त लहजे में कहा कि आतंकवादियों और उनके मददगारों को ऐसी सजा दी जाएगी, जो वे कल्पना भी नहीं कर सकते। उन्होंने इसे सिर्फ पर्यटकों पर नहीं बल्कि भारत की आत्मा पर हमला बताया। 29 अप्रैल को हुई उच्चस्तरीय बैठक में पीएम मोदी ने सेना को आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पूर्ण स्वतंत्रता दी है।
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पाकिस्तान ने आईएमएफ कार्यक्रम को बताया मजबूत
इधर पाकिस्तान ने कहा है कि उसे आईएमएफ से मिले सात अरब डॉलर का राहत पैकेज सही दिशा में इस्तेमाल किया है और देश की आर्थिक स्थिरता के लिए अहम है। पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के सलाहकार खुर्म शहजाद ने कहा, 'यह कार्यक्रम सिर्फ पाकिस्तान को स्थिर नहीं कर रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों में विश्वास भी बढ़ा रहा है।' उन्होंने बताया कि हाल ही में वॉशिंगटन में हुई बैठकों में पाकिस्तान को ग्लोबल संस्थाओं से अच्छी प्रतिक्रिया मिली। मार्च 2025 में पाकिस्तान को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए 1.3 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग भी मिली है।