चांदी में त्योहारी महीने में जोरदार तेजी जारी है, जो दिवाली सप्ताह से पहले लगातार बढ़ रही है। इस तेजी को देखते हुए निवेशकों और आम उपभोक्ताओं ने चांदी की खरदारी शुरू कर दी है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में मुंबई के सराफा बाजार में चांदी की शॉर्टज देखने को मिली। गुरुवार को मुंबई के जावेरी बाजार में चांदी खरीदने आए कुछ उपभोक्ताओं को खाली हाथ जाना पड़ा, क्योंकि बाजार चांदी सीमित होने की वह से डिलीवरी 2 से 3 दिन में देने की बात कही। चांदी के बर्तन तो उपलब्ध थे लेकिन बार और कॉइन नहीं थे। बाजार के जानकर कहते तेजी की वह से रिटेलर मुनाफा कमाने के लिए भी चांदी को सीमित दिखाकर 20 से 25 हजार अतिरिक्त प्रीमियम पर बिक्री की गई है, जिनके पास चांदी का स्टॉक अधिक था उसने इसका फायदा लिया है।
इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के सचिव सुरेंद्र मेहता ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि वैश्विक स्पॉट मार्केट में मूल्य अधिक होने की वजह से इसका प्रभाव देखा जा रहा था, फिलहाल सर्राफा बाजार में चांदी की कमी नहीं है। बाजार में चांदी की खरीदारी सामान्य रूप से हो रही है। उन्होंने कहा कि सोने और चांदी की कीमतें दोनों ही अपने उच्च स्तर पर बनी हुई हैं। इसलिए धनतेरस और दिवाली में आभूषणों की बिक्री 25 से 30 प्रतिशत कम होने का अनुमान है, जबकि सोने और चांदी के सिक्कों की मांग बढ़ेगी। सिल्वर इंपोरियम के राहुल मेहता कहते हैं कि चांदी की उपलब्धता सीमित थी, लेकिन बिल्कुल समाप्त नहीं थी, फिलहाल बाजार में चांदी की कमी नहीं है। चांदी की उपलब्धता सीमित होने की खबर के बाद सर्राफा बाजार में उपभोक्ताओं ने जल्दबाजी में 20 से 25 हजार रुपये अतिरिक्त प्रीमियम चुका कर भी चांदी की खरीदारी की है। फिलहाल बाजार में चांदी अब अपने मूल्य पर उपलब्ध है।
व्यापारिक अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी एक्सचेंज ट्रेडड फंड्स (ईटीएफ) और भौतिक बार व सिक्कों की बढ़ती निवेश मांग के बीच चांदी की कीमतें आसमान पर पहुंच गई है, लेकिन दिवाली के बाद इसमें गिरावट आने की संभावना है, जिससे निवेशकों को नुसकान हो सकता है। बॉम्बे बुलियन एसोसिएशन राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार जैन कहते हैं, ऐसा कई बार देखा गया है कि धनतेरस और दिवाली के बाद चांदी के भाव में कमी आती है। चांदी के पुराने रुझानों पर नजर डालें तो धनतेरस से पहले चांदी 70 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंची और दिवाली के बाद इसकी कीमतों में 35,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक की गिरावट देखी गई है। हालांकि कीमतों में अधिक कमी आने की संभावना कम है, बावूजद इसके निवेशकों को थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है।
होलसेल बुलियन एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश बाफना कहते हैं कि चांदी की कीमतों में यह तेजी उद्योगों की ओर से बढ़ती मांग, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और आपूर्ती में कमी की वजह से बनी हुई है। लेकिन दूसरी ओर इसकी कीमतें कम होने की संभावना से इनकार भी नहीं कर सकते, अगर आपूर्ति बढ़ जाती है, जो कि उद्योग की मांग की वजह से होगी, तो इसकी कीमतों में और वृद्धि आने की गुंजाइश कम हो जाएगी। इतिहास गवाह है कि चांदी में कई बार तूफानी तेजी आने के बाद गिरावट आई है। सोने की तुलना में चांदी का सबसे अधिक इस्तेमाल उद्योग में होता है, इसलिए इसको पूरी तरह सुरक्षित निवेश नहीं माना जाता है।