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IRCTC: ग्राहकों के डेटा से कमाई का फैसला बदलेगी कंपनी, निविदा जारी होते ही शुरू हुआ विरोध

Fri, 19 Aug 2022 08:09 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

IRCTC: इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) अपने पास मौजूद ग्राहकों का विशाल डाटा बेचकर 1000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने की योजना बना रहा है। इसके लिए कॉरपोरेशन ने सलाहकार की नियुक्ति के लिए टेंडर जारी किया है।
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आईआरसीटीसी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रेलवे ने अपने यात्री और माल ढुलाई ग्राहक डेटा का मुद्रीकरण करने और इससे 1,000 करोड़ रुपये तक का राजस्व तैयार  करने के लिए एक सलाहकार को नियुक्त करने की निविदा जारी की है, पर सूत्राें के हवाले से कहा जा रहा है कि गोपनीयता की चिंताओं को देखते हुए इसे वापस लिया जा सकता है।

बता दें कि रेलवे की ओर से इस मामले में निविदा जारी करने की सूचना के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे गोपनीयता का उल्लंघन बताते हुए इस पर चिंता जाहिर की थी। बता दें कि सरकार के सूत्रों की ओर से कहा गया था कि निविदा के माध्यम से नियुक्त सलाहकार आईआरसीटीसी (Indian Railway Catering and Tourism Corporation) को यह सलाह देगा कि कैसे इसका रेवेन्यू बढ़ाया जाए। 

अब खबरें आ रही हैं गोपनीयता की चिंता को देखते हुए इस निविदा को वापस ले लिया जाएगा। हालांकि रेलवे ने अब तक इस मामले में आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है पर रेलवे में महत्वपूर्ण पद पर पदस्थ एक अधिकारी के अनुसार इस निविदा को वापस ले लिया जाएगा। ऐसा डेटा प्रोटेक्शन बिल के अब तक फाइनल नहीं हो पाने के कारण किया जा सकता है।  

बता दें कि इससे पहले खबर आई थी कि इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) अपने पास मौजूद ग्राहकों का विशाल डाटा बेचकर 1000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने की योजना बना रहा है। इसके लिए कॉरपोरेशन ने सलाहकार की नियुक्ति के लिए टेंडर जारी किया है। हाल में ही जारी इस टेंडर में कहा गया है, आईआरसीटीसी के पास विशाल डिजिटल डाटा का भंडार है, जो मौद्रीकरण की अपार संभावनाएं पैदा करता है।

आईआरसीटी की इच्छा है कि इस डाटा संपत्ति का लाभ उठाकर राजस्व में मजबूत बढ़ोतरी की जाए। इस डिजिटल डाटा का मौद्रीकरण कर 1000 करोड़ रुपये तक जुटाए जा सकते हैं। इसके लिए वह सलाहकार फर्म की सेवा लेना चाहता है जो डाटा मौद्रीकरण के अवसरों को भुनाने के लिए पहचान, डिजाइन और विकास का काम करे।

आईआरसीटीसी की ओर से जारी इस निविदा की खबर सामने आने के बाद इस फैसले की जमकर आलोचना होने लगी। विरोध करने वालों का तर्क है कि आईआरसीटीसी के पास ग्राहकों के निजी फोन नंबर, घर के पते, बैंक खातों की जानकारी जैसे बेहद संवेदनशील डाटा हैं। ग्राहक इन संवेदनशील जानकारियों को इस भरोसे पर सौंपते हैं कि डाटा किसी तीसरे पक्ष के पास नहीं जाएगा। आईआरसीटीसी इस डाटा को तीसरे पक्ष से साझा करता है तो यह ग्राहकों का भरोसा तोड़ने जैसा होगा।

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