पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकारों के संरक्षण के लिए प्राधिकरण (पीपीवी एंड एफआर) शुक्रवार को पेप्सिको इंडिया को बड़ा झटका दिया। प्राधिकरण ने पेप्सिको इंडिया को आलू की एक किस्म 'एफएल-2027' पर दिए गए पंजीकरण प्रमाणपत्र को रद्द कर दिया है। इसे लेकर कंपनी ने कहा है कि हम फिलहाल प्राधिकरण की ओर से पारित किए गए आदेश के अध्ययन की प्रक्रिया में हैं।
यह प्राधिकरण पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकारों के संरक्षण के लिए अधिनियम के तहत गठित किया गया एक सांविधिक निकाय है। इसने यह निर्णय कृषि कार्यकर्ता कविता कुरुगांति की ओर से दायर की गई एक याचिका पर लिया है। इस याचिका में यह दावा किया गया है कि पेप्सिको इंडिया को यह अधिकार और प्रमाणपत्र गलत जानकारी के आधार पर दिया गया है।
याचिका के अनुसार पेप्सिको इंडिया को आलू की किस्म पर दिया गया बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) के लिए दिया गया पंजीकरण निर्धारित नियमों के अनुसार नहीं था। याचिका में इसे जनहित के खिलाफ बताया गया है। प्राधिकरण ने भी याचिकाकर्ता से सहमति जताते हुए रजिस्ट्रार के प्रमाणपत्र जारी करने पर हैरानी व्यक्त की और पंजीकरण को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।
फैसले में प्राधिकरण ने रजिस्ट्रार पर भी नाराजगी जताई औऱ कहा कि किसानों के अधिकारों का संरक्षक होते हुए भी उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया और इससे किसानों व अन्य को परेशानी हुई। यह बिल्कुल अस्वीकार्य है। प्राधिकरण ने रजिस्ट्रार को नियमों के अनुसार पौधों की किस्मों के पंजीकरण के लिए आवेदन के मूल्यांकन के लिए एक मानकीकृत शीट तैयार करने का निर्देश दिया।
नियमों के अनुसार नहीं था रजिस्ट्रेशन
पेप्सिको इंडिया के खिलाफ याचिका दायर करने वाली कृषि कार्यकर्ता कविता कुरुगंती ने दावा किया था कि आलू की एक किस्म के लिए पेप्सिको इंडिया को दिया बौद्धिक संपदा अधिकार रजिस्ट्रेशन के तय नियमों के अनुसार नहीं है और यह जनहित के भी खिलाफ है। वहीं, कंपनी ने कहा, वह आदेश की समीक्षा कर रहा है।
आलू की खासियत
आलू की इस किस्म में आर्द्रता अपेक्षाकृत कम होती है, जिसके कारण इसका इस्तेमाल चिप्स बनाने में होता है।
यह है पूरा मामला
2016 में पेप्सिको ने पैकेट बंद चिप्स में इस्तेमाल होने वाले एफएल-2027 का पंजीकरण करवाया था और दूसरे किसानों को यह आलू उगाने से मना कर दिया गया। 2018 में कंपनी ने इस किस्म के आलू के बीज उगाने पर गुजरात के 5 किसानों और अगले साल फिर 4 किसानों पर केस कर दिया। इन सभी से डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपये का मुआवजा भी मांगा गया। कविता कुरुगंती ने पेप्सिको के खिलाफ जून 2019 को प्राधिकरण में आवेदन दिया। उस समय तो पेप्सिको पीछे हट गया, लेकिन वह किसानों को यह किस्म उगाने देने पर राजी नहीं था। 30 महीने तक चली सुनवाई के बाद शुक्रवार को इस मामले में फैसला किसानों के पक्ष में आया।