केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने 15 मई, 2017 को एक एफआईआर दर्ज की थी। जिसमें आरोप था कि आईएनएक्स मीडिया कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए विदेशी निवेश को स्वीकृति देने वाले विभाग फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) ने कई तरह की गड़बड़ियां की थीं। जिस वक्त कंपनी को निवेश की स्वीकृति दी गई थी, उस समय पी चिदंबरम वित्त मंत्री थे। इसलिए बुधवार देर रात पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया केस में भष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) एक ऐसी एजेंसी थी जो देश में निवेश संवर्धन करने के साथ-साथ एफडीआई से संबंधित मामलों पर आवश्यक कार्रवाई करती थी। एफआईपीबी उन एफडीआई प्रस्तावों का आकलन करता रहा है, जिनके लिए सरकार की मंजूरी की जरूरत होती है।
1990 के दशक की शुरुआत में आर्थिक उदारीकरण के मद्देनजर प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत विभाग फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड का गठन किया गया था। बाद में 1996 में बोर्ड का पुनर्गठन किया गया और औद्योगिक नीति एवं संवर्धन बोर्ड के अंतर्गत लाया गया। पुन: वर्ष 2003 में इसे आर्थिक मामलों के विभाग के दायरे में लाया गया।
साल 2017-18 में पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में एफआईपीबी को भंग करने का फैसला लिया था।
इस बोर्ड का काम था कि यह जल्द से जल्द विदेशी निवेश के प्रस्तावों को स्वीकृत करे, अन्य एजेंसियों को पारदर्शिता बनाए रखने और विभिन्न क्षेत्रों में एफडीआई को बढ़ावा देने का भी बोर्ड काम करता था। यह बोर्ड विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकारी, गैर-सरकारी और तमाम अन्य उद्योगों से बात करता था।