पैसिव फंड में इंडेक्स फंड, ईटीएफ (गोल्ड, सिल्वर व अन्य) और विदेशी एक्सचेंज जैसे हैंगसेंग, न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में निवेश के लिए फंड ऑफ फंड्स (ओवरसीज) शामिल हैं। कम खर्च, आसान निवेश और स्थिर लॉन्ग-टर्म रिटर्न की वजह से ये फंड तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। म्यूचुअल फंड में निवेशक के नियम बदल रहे हैं। पुराना नियम था, तेज उतार-चढ़ाव में जानकार या फंड मैनेजर का हाथ थामो, यानी एक्टिव फंड पर दांव लगाओ, जिसे कोई विशेषज्ञ संभालता है। मगर अब पिछले एक साल के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि निवेशक सक्रिय (एक्टिव) फंड्स के बजाय तेजी से निष्क्रिय (पैसिव) फंड्स पर भरोसा कर रहे हैं।
क्या होते हैं पैसिव फंड?
कुछ नुकसान भी हैं-
रिटर्न के मामले में एक्टिव से आगे पैसिव
जोखिम के बीच संतुलित कदम
कम लागत, अधिक पारदर्शिता और बाजार के औसत रिटर्न के साथ सुरक्षित रूप से निवेश शुरू करने वालों के लिए इंडेक्स फंड अच्छा एंट्री प्वाइंट है। निवेशक अब अनुशासन, पारदर्शिता और कम लागत को प्राथमिकता दे रहे हैं। वह जान गए हैं कि बाजार को हराने की कोशिश करने से बेहतर है कि बाजार के साथ चला जाए।
मेजर आशीष चड्ढा (रि.)
सीईओ, चड्ढा इनवेस्टमेंट कंसल्टेंट प्रा. लि.
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