म्यूचुअल फंड उद्योग के जाने माने फंड मैनेजर संकरन नरेन कहते हैं कि किसी भी निवेशक को ऐसे फंड में निवेश करना चाहिए जो कम से कम बेंचमार्क से बेहतर रिटर्न दे सके। अगर बेंचमार्क छह फीसदी सालाना रिटर्न देता है तो आप जहां पर निवेश कर रहे हैं वहां से कम से कम आठ फीसदी का रिटर्न हासिल होना चाहिए। फंड प्रबंधक का काम ही यही होता है।
अगर कोई फंड प्रबंधक अपने निवेशकों को बेंचमार्क से ज्यादा रिटर्न नहीं देता है तो फिर निवेशकों को किसी अच्छे प्रबंधक की तलाश करना चाहिए। बाजार में बहुत सारी फंड स्कीमें ऐसी हैं जो बेंचमार्क से बेहतर रिटर्न दे रही हैं। एक रणनीति के तहत वैल्यू थीम इस समय बेहतर साबित हो रही है। निवेशकों को यह याद रखने की जरूरत है कि वैल्यू निवेश एक धैर्यवान निवेशक के लिए लंबी अवधि में अच्छा प्रदर्शन करेगा। यह स्कीम उन क्षेत्रों में निवेश करती है जो लंबे समय में बढ़ने की क्षमता रखते हैं। विदेशों में वैल्यू निवेश एक स्थापित और अच्छी तरह से खोजी गई अवधारणा है और भारत में भी हर व्यक्ति किसी भी चीज में एक वैल्यू की तलाश जरूर करता है।
18 साल में वैल्यू थीम का बेहतर प्रदर्शन
वैल्यू रिसर्च के आंकड़े बताते हैं कि अगर किसी ने 2004 में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के वैल्यू डिस्कवरी फंड में 10 लाख रुपये का निवेश किया होगा तो वह रकम आज 2.5 करोड़ रुपये हो गई है। यानी 19.7 फीसदी सालाना का रिटर्न है। जबकि इसके बेंचमार्क निफ्टी 50 में यही रकम इस समय 1.3 करोड़ रुपये हुई है। यानी इसने 15.6 फीसदी की दर से रिटर्न दिया है। यह स्कीम वैल्यू निवेश के तरीकों का पालन करती है। यह विविधीकृत पोर्टफोलियो के स्टॉक में निवेश करती है, जो आकर्षक मूल्यांकन पर सस्ते भाव में होते हैं।
10 हजार मासिक एसआईपी पर वैल्यू डिस्कवरी फंड का रिटर्न
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5 साल |
3 साल |
| निवेश की गई रकम |
6 लाख रु |
3.6 लाख रु |
| जुलाई के अंत में कीमत |
9.61 लाख रु |
5.34 लाख रु |
| फीसदी में रिटर्न |
18.97 |
27.59 |
| निफ्टी 50 टीआरआई (फीसदी) |
14.62 फीसदी |
19.51 फीसदी |
वैल्यू निवेश में आकर्षण बढ़ा
आईप्रू म्यूचुअल फंड के एमडी निमेशा शाह का कहना है कि "पिछले कुछ सालों से हमने देखा है कि वैल्यू निवेश में भारतीय निवेशकों का आकर्षण बढ़ा है। निवेशक अब जागरुक हो गए हैं। अब यह महत्वपूर्ण है कि निवेशक इसका पूरी लगन से पालन करें। हमारी सलाह है कि कम से कम 5 साल तक के लिए निवेश करें। लंबे निवेश में चक्रवृद्धि दर से रिटर्न मिलता है।"
मिडकैप में निफ्टी से ज्यादा ज्यादा रिटर्न
मिडकैप फंडों की स्कीम को देखें तो इन्होंने भी अपने बेंचमार्क की तुलना में ज्यादा रिटर्न दिया है। उदाहरण के तौर पर एडलवाइस मिडकैप फंड ने 14 सालों में 4.4 गुना का रिटर्न दिया है। किसी ने 2007 में अगर हर महीने 10 हजार रुपये का एसआईपी इस फंड में किया होगा तो यह रकम अब 78.16 लाख रुपये हो गई है। जबकि उसका मूल निवेश 17.60 लाख रुपये था। यानी 18.43 फीसदी सालाना रिटर्न मिला है। इसी अवधि में निफ्टी मिडकैप 150 इंडेक्स टीआरआई का रिटर्न 16.87 फीसदी रहा है। इसमें एसआईपी निवेश का मूल्य 68.44 लाख रुपये हुआ है।
निफ्टी 50 टीआरआई में केवल 12.78 फीसदी रिटर्न
अगर किसी ने निफ्टी 50 टीआरआई में 2007 से हर महीने 10 हजार रुपये का एसआईपी किया होगा तो वह रकम 48.44 लाख रुपये हुई है। यानी केवल 12.78 फीसदी का रिटर्न मिला है। पांच साल में निफ्टी 50 टीआरआई ने जहां 15.38 फीसदी का फायदा दिया है वहीं एडलवाइस के मिडकैप ने 20 फीसदी से ज्यादा का फायदा दिया है। पांच साल में बिरला सनलाइफ के मिडकैप फंड ने 25.1 फीसदी का रिटर्न दिया है।
बाजार पूंजीकरण के आधार पर होता है निवेश
मिडकैप इक्विटी फंड बाजार पूंजीकरण के आधार पर मध्यम कंपनियों में निवेश करते हैं। बाजार पूंजीकरण के लिहाज से 101 से 250 के बीच की कंपनियां मिडकैप में शामिल होती हैं। मिडकैप स्टॉक निवेशकों को लार्ज कैप की तुलना में बेहतर विकास की संभावनाओं में निवेश का मौका देते हैं। ये उतार-चढ़ाव और स्मॉल कैप स्टॉक की तुलना में कम जोखिम वाले होते हैं।