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निवेश की बात: म्यूचुअल फंड में कम जोखिम अच्छा फायदा, कम प्रदर्शन करने वाली थीम में लगाएं पैसा

Mon, 28 Mar 2022 06:43 AM IST
देव कश्यप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में खुदरा निवेशक तब निवेश करते हैं, जब शेयर बाजार तेजी पर होता है। अच्छे मुनाफे के लिए इस तरह की रणनीति सही नहीं होती है। जानकार कहते है कि आप शेयर बाजार में पहले तो सीधे निवेश करने से बचें, क्योंकि बहुत ज्यादा जानकारी नहीं होती है। म्यूचुअल फंड में निवेश का गणित बताती अजीत सिंह की रिपोर्ट-
 
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म्यूचुअल फंड (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock
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विस्तार
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आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) एस. नरेन कहते हैं कि इस समय ऐसी थीम में निवेश करें, जो अभी तक प्रदर्शन नहीं कर पाई हैं। आप चाहें तो इसके लिए एसेट अलोकेशन या फिर हाउसिंग थीम का चुनाव कर सकते हैं क्योंकि एसेट अलोकेशन बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाता है और कोरोना के बाद से हाउसिंग सेक्टर तेजी में है।

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म्यूचुअल फंड में निवेश करने के कई कारण हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, आपके पैसे का प्रबंधन एक ऐसा फंड प्रबंधक करता है, जिसे इसमें महारत हासिल होती है और दशकों से वह इसी काम को करता है। इसलिए फंड प्रबंधन को आपके पैसे के निवेश की जानकारी होती है। फंड प्रबंधक नुकसान से बचाने के लिए आपके पैसे को बहुत ही सोच-समझकर इक्विटी मार्केट, डेट मार्केट या किसी अन्य साधन में निवेश करता है।  

महंगाई से पार पाने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट घाटे का सौदा
फिक्स्ड डिपॉजिट एक तरह से घाटे का सौदा होता है। फिलहाल ज्यादातर बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर 5-6 फीसदी का ब्याज देते हैं, जबकि महंगाई की दर 7 फीसदी के करीब है। ऐसे में आपका फायदा एक फीसदी कम होता है। इसलिए आप चाहें तो इस पैसे को म्यूचुअल फंड की शॉर्ट टर्म फंड में रखें, जहां पर सालाना 7-8% तक फायदा मिल सकता है। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में भी निवेश कर सकते हैं। यानी शॉर्ट टर्म से सीधे आपका पैसा एसआईपी में चला जाएगा तो आपको दो तरह से इस पर फायदा मिलेगा।
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बेंचमार्क से ज्यादा रिटर्न की कोशिश
फंड प्रबंधन की यह जिम्मेदारी होती है कि वह निवेशकों को उनके निवेश पर कम-से-कम बेंचमार्क यानी स्टॉक एक्सचेंज की तुलना में ज्यादा रिटर्न दे और ऐसा होता भी है। म्यूचुअल फंड की एक ही योजना के जरिये आपका निवेश कई शेयरों में होता है क्योंकि फंड हाउसों के पास काफी सारे पैसे आते हैं तो वे इसे अलग-अलग क्षेत्र और अलग-अलग थीम वाले शेयरों में लगाते हैं। साथ ही जब जोखिम दिखता है तो वे उस समय इसे ऑटोमेटिक तरीके से एक से दूसरी स्कीम में बदल भी देते हैं।

शेयर बाजार में 10 फीसदी की गिरावट
इस समय शेयर बाजार में इसके सर्वोच्च स्तर से 10 फीसदी की गिरावट है। अक्तूबर में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 62 हजार से ऊपर था जो अब 57,300 से ऊपर है। ऐसे में इस गिरावट में आपको सस्ते भाव पर शेयर मिलेंगे जिसके लिए आप इक्विटी स्कीम का सहारा ले सकते हैं। इसके जरिए आप कई शेयर्स में निवेश कर सकते हैं। 

म्यूचुअल फंड क्या होता है?
बीमा, एफडी या किसी और विकल्प की तरह यह भी निवेश का साधन है। हालांकि विदेशी बाजारों के मुकाबले भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग अभी उतना परिपक्व नहीं है, लेकिन 5-7 वर्षों में इसने अच्छी बढ़त हासिल की है। इस समय उद्योग 38 लाख करोड़ रुपये के पार है यानी निवेशकों का जो निवेश किया हुआ पैसा है, उसका मूल्य इस स्तर पर है। 

एसआईपी के जरिए निवेश करें
निवेशकों को एसआईपी के जरिये निवेश करना चाहिए। लंबे समय में अगर आप संपत्ति का निर्माण करना चाहते हैं तो फिर यह एक व्यवस्थित तरीके से सभी स्तर के इक्विटी बाजार में अनुशासित तरीके से निवेश का अवसर देता है। हालांकि, बाजार की भारी गिरावट में निवेशक एकमुश्त भी निवेश कर सकते हैं। मध्यम से लंबी अवधि को लेकर हमारा नजरिया शेयर बाजार के प्रति सकारात्मक है। अगर आप मौजूदा माहौल में म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहते हैं तो कम-से-कम तीन से पांच साल का लक्ष्य लेकर चल सकते हैं। - संजीव गुप्ता जीसीआईसी इन्वेस्टमेंट

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