विश्लेषकों का कहना है कि मिड और स्मॉलकैप शेयरों का मूल्यांकन अभी बहुत ज्यादा है। पिछले कुछ वर्षों में इन दोनों में जमकर निवेश आया है। हालांकि, इन्होंने रिटर्न भी बहुत ज्यादा दिया है। ऐसे में पिछले रिटर्न को देखकर अगर कोई निवेश करता है तो यह जोखिम हो सकता है। निवेशकों को जोखिम से बचाने के लिए ही सेबी ने हाल में फैसला लिया है। जानकारों का कहना है कि अगर मिड और स्मॉलकैप में निवेश करना है तो आप एकमुश्त निवेश बिलकुल मत करिये। लंबे समय के लिए आप एसआईपी कर सकते हैं। इस समय मूल्यांकन गिरा है, ऐसे में सस्ते भाव में आपको म्यूचुअल फंड यूनिट मिल जाएंगे। ध्यान रखें, निवेश कम से कम पांच साल के लिए हो।
नियामक सेबी ने इसलिए उठाया कदम
सेबी दरअसल निवेशकों की सुरक्षा करना चाहता है। इसलिए उसने 27 फरवरी को फंड हाउसों को पत्र लिखा। इसमें मिड कैप और स्मॉल कैप पर चिंता जताया। इसने कहा, निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए फंड हाउस नीति तैयार करें। फंड हाउसों को भी यह बात पता थी कि मूल्यांकन ज्यादा है। सेबी ने स्ट्रेस टेस्ट का परिणाम 15 मार्च तक वेबसाइट पर डालने को कहा। हालांकि, पहले भी फंड हाउस अपने स्तर पर यह काम करते थे, पर यह कभी सार्वजनिक नहीं हुआ। इस बार फंड हाउसों को जब इसे सार्वजनिक करना पड़ा तो बाजार में हाहाकार मच गया।
स्ट्रेस टेस्ट क्या है और कैसे काम करता है
स्ट्रेस टेस्ट का मतलब है कि अगर कभी अचानक मिड और स्मॉलकैप में भारी निकासी आ जाए तो उससे कैसे निपटा जा सकता है। ज्यादा निकासी पर कितने दिन में इसे पूरा किया जा सकता है। स्टॉक में तरलता कितने दिनों की है। दरअसल, जो भारी निवेश इन दोनों सेगमेंट में आया है और रिटर्न चौंकाने वाला है, उसे देखकर नए निवेशक आ रहे हैं। जबकि इन दोनों सेगमेंट में बहुत ज्यादा तरलता नहीं होती है। ऐसे में फंड हाउस निवेशकों की ओर से आ रहे पैसों को कहां लगाएंगे, यह भी सुनिश्चित करना होगा।
फरवरी में फंड हाउसों ने बेचे स्मॉलकैप
ज्यादातर फंड हाउसों ने फरवरी में स्मॉलकैप शेयर बेचे हैं। कुछ ने मिडकैप में खरीदी की है। फंड हाउसों ने हाल में ज्यादातर निवेश इन्हीं दोनों सेगमेंट में किया है। ज्यादा खरीदारी से इन शेयरों ने 70-80 फीसदी तक रिटर्न दिया है। इसी रिटर्न को देखकर खुदरा निवेशक लगातार पैसे लगा रहे थे। ऐसे में इन शेयरों में कभी भी भारी निकासी होने की आशंका है।
बाजार विशेषज्ञ अनुराग शाह के मुताबिक मिड व स्मॉलकैप शेयरों में उठापटक को देखते हुए संभलकर निवेश करें। अभी मूल्यांकन काफी ऊंचा है, जब तक इनमें गिरावट न आए, लंबे समय के लिए एसआईपी निवेश का रास्ता अपना सकते हैं।