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निवेश: बाजार में गिरावट के बाद भी बंद न करें एसआईपी, चक्रवृद्धि ब्याज की शक्ति में रखें भरोसा

सार

बाजार में गिरावट के दौरान निवेशकों को अधिक संख्या में म्यूचुअल फंड यूनिट मिलते हैं, जिससे उनकी औसत लागत घट जाती है। बाजार में जब सुधार होता है, तो निवेशकों को एकतरफा तेजी वाले बाजार की तुलना में अधिक रिटर्न मिलता है।
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Mutual Fund SIP - फोटो : Istock
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विस्तार
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शेयर बाजार में गिरावट लगातार जारी है। सेंसेक्स और निफ्टी 27 सितंबर, 2024 के बाद से अब तक क्रमशः 14.86 फीसदी और 15.80 फीसदी टूट चुके हैं। ऐसे में सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वाले निवेशकों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या उन्हें अपना निवेश जारी रखना चाहिए या बंद कर देना चाहिए।

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विशेषज्ञों का मानना है कि गिरते बाजार के कारण एसआईपी बंद नहीं करना चाहिए। जो निवेशक चक्रवृद्धि ब्याज की शक्ति में भरोसा करते हैं, उन्हें बाजार में गिरावट को अवसर मानकर लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न पाने के लिए अपना निवेश बढ़ा देना चाहिए।

निवेश के मूल्यांकन का उचित समय
निवेश सलाहकार स्वीटी मनोज जैन का कहना है कि एसआईपी निवेश का सिर्फ एक तरीका है। आखिरकार, आपका पैसा किसी फंड में जाता है, इसलिए बाजार में गिरावट के बीच यह मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण हो जाता है कि आपने सही फंड में निवेश किया है, जो आपके वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम क्षमता के अनुरूप है।
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ऐसे समझें गणित
बाजार में गिरावट के दौरान निवेशकों को अधिक संख्या में म्यूचुअल फंड यूनिट मिलते हैं, जिससे उनकी औसत लागत घट जाती है। बाजार में जब सुधार होता है, तो निवेशकों को एकतरफा तेजी वाले बाजार की तुलना में अधिक रिटर्न मिलता है। उदाहरण...अगर कोई निवेशक हर महीने 10,000 रुपये का एसआईपी करता है, तो 20 साल में 10 फीसदी रिटर्न के हिसाब से उसके पास 76 लाख से ज्यादा का फंड जमा होगा। बाजार में सुधार के दौरान रिटर्न बढ़कर 15 फीसदी होने पर 10,000 रुपये का यही मासिक निवेश 20 साल में बढ़कर 1.51 करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाएगा।

लार्ज-कैप कंपनियों में निवेश का समय
 बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मिड और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट तेज है, इसलिए निवेशकों को रिलायंस इंडस्ट्रीज, इन्फोसिस, एचडीएफसी जैसी लार्ज-कैप कंपनियों को प्राथमिकता देनी चाहिए। रक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे घरेलू थीम आकर्षक बने हुए हैं। इन क्षेत्रों में कोई भी गिरावट निवेश का मौका हो सकती है। मिडकैप शेयरों में इस साल अब तक 16 फीसदी गिरावट रही है, जबकि स्मॉलकप 21 फीसदी टूट चुके हैं। 

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