शेयर बाजार में निवेश अफवाहों या खबरों के आधार पर कई बार आपको जमीन पर ला पटकता है। ऐसे बहुतेरे मामले सामने आए हैं, जब निवेशकों की गाढ़ी कमाई इन वजहों से डूब गई है। ताजा मामला अदाणी समूह का है। इस पूरे मामले में अब सुप्रीम कोर्ट की नियुक्त समिति की रिपोर्ट ने उन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है जो अदाणी समूह को और नीचे गिराने की प्रतीक्षा कर रहे थे।
हम एलआईसी, एसबीआई और अदाणी के शेयर धारकों को क्या संदेश देना चाहते हैं? अगर कल एलआईसी और एसबीआई अपना कारोबार खो देते हैं, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? निवेशकों का जो घाटा हुआ है, क्या उन्हें मुआवजा मिल सकता है? अगर नहीं तो फिर निवेशकों को कहां न्याय मिलेगा। -जीएन वाजपेयी, पूर्व चेयरमैन, सेबी
शेयरों में सुधार से निवेशकों को उम्मीदें
जनवरी में आई हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद से अदाणी समूह के शेयर जो टूटे थे, वहां से करीब 40 फीसदी तक चढ़ चुके हैं। पर, सवाल सिर्फ इस समूह का नहीं है। ऐसा कई बार देखा गया है। किसी भी रिपोर्ट का नतीजा बाद में कुछ भी हो, पर निवेशकों के घाटे की भरपाई करने और उनका भरोसा बहाल करने में बहुत समय चला जाता है। इसलिए निवेशकों को खबरों के आधार पर निवेश रणनीति नहीं बदलनी चाहिए।