देश के 90 फीसदी दोपहिया वाहनों की पिछली सीट खाली रहती है। इस बात से दुखी गुंटुपल्ली का कहना है कि केंद्र व राज्य सरकारें साथ दें तो यह खाली सीट नौजवानों को रोजगार देने और शहरों का प्रदूषण घटाने में क्रांतिकारी भूमिका निभा सकती है।
कार के मुकाबले कितनी किफायती है दोपहिया एप की सवारी?
आपके ड्राइवरों की औसत आयु क्या है? इनमें कितनी महिलाएं हैं?
हमारे ड्राइवरों में ज्यादातर 20 से 40 साल की उम्र के हैं। इनमें भी 20 से 30 साल की उम्र वाले ज्यादातर कैप्टन पार्ट टाइमर हैं। 30 से 40 आयु वर्ग वाले ज्यादातर फुल टाइमर हैं। दूसरी तरह से देखें तो हमारे 70 फीसदी ड्राइवर पार्ट टाइमर के तौर पर काम करते हैं। कुल ड्राइवरों में 5 से 7 फीसदी महिलाएं हैं। हम गुवाहाटी, चेन्नई जैसे कई शहरों में एनजीओ की मदद से लड़कियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं ताकि वे भी रोजगार पा सकें। उन्हें किराये पर वाहन भी दिलाने में मदद कर रहे हैं।
सिर्फ लड़कियों को विशेष प्रशिक्षण क्यों?
एक तो बेटियों को सशक्त बनाने का सामाजिक मकसद है। दूसरे, इससे ही भविष्य में हमारे महिला कस्टमरों की संख्या बढ़ेगी। दोपहिया राइड लेने वाली महिला तभी ज्यादा सुरक्षित महसूस करेगी, जब ड्राइवर महिला ही हो। अभी रैपिडो से राइड बुक कराने वाले हमारे कुल कस्टमर में 22 फीसदी ही महिलाएं हैं। हम जल्द इसे 50 फीसदी तक ले जाना चाहेंगे।
आगे की रणनीति का मुख्य बिंदु?
हम चाहते हैं कि वर्ष 2027 तक हम देश में हर रोज 70 लाख सवारियों के सफर का माध्यम बन जाएं। लोग घर से बाहर निकलें तो रैपिडो की मार्फत आएं वाहन पर बैठकर ही अपनी मंजिल तक सफर तय करें।
नए उद्यमियों और स्टार्टअप के लिए कोई खास नसीहत देना चाहेंगे?
चाहे दुनिया कितना ही नामुमकिन बताए, अपने आइडिया पर कोशिश जरूर करें। सात साल पहले बाइक टैक्सी की बात पर न तो ड्राइवरों को यकीन होता था न कस्टमर को। हर रोज 500 राइड व 10 हजार डाउनलोड तक पहुंचने में दो महीने लगे थे।
बाद में कितने ही उतार-चढ़ाव आए। गलतियों से सीखा भी। आज अपने सेगमेंट में टॉप पर हैं, तब भी संतुष्ट होकर नहीं बैठै हैं। नौजवानों से भी कहना चाहूंगा कि मां-बाप के पैसे से नहीं, अपनी पार्ट टाइम कमाई से खर्च पूरे कीजिए। गर्व के साथ रैपिडो का कैप्टन बनिए।