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खास बातचीत: वाइल्डक्राफ्ट के सह-संस्थापक गौरव बोले- छोटे शहरों में भी खरीदार दाम नहीं गुणवत्ता देखते हैं

सार

वाइल्डक्राफ्ट के सह-संस्थापक गौरव दुब्लिश से संजय अभिज्ञान की हुई खास बातचीत के अंश...
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वाइल्डक्राफ्ट के सह-संस्थापक गौरव दुब्लिश। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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एडवेंचर क्लोदिंग और आउटडोर वियर क्षेत्र की अग्रणी कंपनी वाइल्डक्राफ्ट ने देश में कामयाबी का परचम लहराया है। किफायती दामों में अंतरराष्ट्रीय क्वालिटी देने का दावा करने वाली कंपनी के 72 शहरों में 200 एक्सक्लूसिव स्टोर हैं। सालाना खुदरा कारोबार 1,000 करोड़ से अधिक का है।

  • कंपनी की रिकॉर्ड बिक्री ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है कि छोटे शहरों के उपभोक्ता सस्ता माल ही खरीदना चाहते हैं।
  • कुल कारोबार का 40 फीसदी हिस्सा गैर-मेट्रो शहरों से आ रहा है। बाकी 60 फीसदी शीर्ष-10 शहरों से।
  • बरेली, हल्द्वानी, मेरठ, देहरादून जैसे शहरों में एक्सक्लूसिव स्टोर खोलने का मकसद था कि उपभोक्ता को जहां भी क्वालिटी के बैकपैक आदि चाहिए, वहां वाइल्डक्राफ्ट का स्टोर मौजूद हो।

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सवाल: बमुश्किल 25 साल में वाइल्डक्राफ्ट आउटडोर वियर क्षेत्र का एक प्रमुख ब्रांड बन गया है। अब तक के सफर के खास पड़ाव क्या रहे?
जवाब: वर्ष 1999 के दौरान मैं और सिद्धार्थ सूद दोनों मुंबई में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन का कोर्स कर रहे थे। उससे एक साल पहले बंगलूरू में वाइल्डक्राफ्ट के सह-संस्थापक दिनेश के हाथों इस कंपनी की नींव पड़ चुकी थी। तब हम बहुत सक्रिय तौर पर कंपनी से नहीं जुडे़ थे। पढ़ाई के बाद हम दोनों ने मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी की और करीब आठ साल बाद 2007 में हमने नौकरी छोड़कर पूरी तरह से वाइल्डक्राफ्ट से जुड़ने का फैसला किया। यूं समझिए कि कंपनी के दो और सह-संस्थापकों के रूप में मैंने और सिद्धार्थ सूद ने कामकाज को संभाला। ध्येय केवल एक था...उपभोक्ता को किफायती दाम में विश्वस्तरीय क्वालिटी मुहैया कराना। सरोकार था और कुछ अपना करने का जुनून भी। बस, बात बनती चली गई।

सवाल: कंपनी का मौजूदा नेटवर्क कितना फैला है?
जवाब: आज 72 शहरों में हमारे 200 एक्सक्लूसिव स्टोर हैं। वितरण तंत्र की बात करें तो देश-विदेश में करीब 6,500 आउटलेट पर हमारे उत्पाद उपलब्ध हैं। साथ में एक बिजनेस-टु-बिजनेस नेटवर्क भी है। मसलन, भारतीय सेना को हमारा माल सप्लाई होता है। हर साल करीब 80 लाख उपभोक्ताओं तक हमारा कोई न कोई उत्पाद पहुंचता है। बंगलूरू में 3,000 कर्मचारियों वाला हमारा एक कारखाना पहले से है। अब कर्नाटक में ही दूसरा प्लांट लगाने की तैयारी है। मुख्यत: तीन श्रेणियों में हमारे उत्पाद बांटे जा सकते हैं...एडवेंचर क्लोदिंग यानी आउटडोर वियर, फुटवियर और एक्सेसरीज यानी सहायक उपकरण। जैकेट, चीटर्स, ट्राउजर्स, स्वेट शर्ट, टीशर्ट, पुलोवर, कारगो शर्ट, ट्रैकसूट, बॉटम वियर यानी लोअर, ट्रैकपैंट, रेनकोट, रेनसूट, सैंडल, ट्रैवल शू, बैकपैक, लैपटॉप बैकपैक, रकसैक, टेकपैक, डफल बैग, स्लीपिंग बैग और टेंट। अलग-अलग आकार के ट्रॉली बैग, मास्क और अन्य पर्सनल प्रोटेक्शन गियर।

  • स्त्री और पुरुष दोनों के अलग-अलग आयुवर्ग के लिए ऐसे दर्जनों उत्पाद हम इन तीन श्रेणियों के तहत बनाते हैं।

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सवाल: छोटे शहरों में आपका नेटवर्क मजबूत है। क्या यह व्यापारिक रणनीति का हिस्सा है?
जवाब: बेशक, हमारे बहुत सारे स्टोर टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्थित हैं। बरेली, अल्मोड़ा, हल्दवानी, मेरठ, देहरादून जैसे शहरों में एक्सक्लूसिव स्टोर खोलने का मकसद यही था कि उपभोक्ता को जहां कहीं भी क्वालिटी के बैकपैक, रकसक बैग या ट्रेकिंग शू चाहिए, वहां वाइल्डक्राफ्ट का स्टोर मौजूद हो। आज हमारे कुल कारोबार का 40 फीसदी हिस्सा कथित छोटे शहरों से यानी गैर-मेट्रो शहरों से आ रहा है। बाकी 60 फीसदी शीर्ष-10 शहरों यानी महानगरों से आ रहा है। वाइल्डक्राफ्ट लॉन्ग टर्म गेम यानी लंबी रेस का घोड़ा बनने में यकीन रखती है, इसलिए देश के शीर्ष-100 शहरों में मौजूदगी बनाना हमारा रणनीतिक लक्ष्य है। अब हम इसके काफी करीब हैं।

  • छोटे शहरों में क्वालिटी की मांग बडे़ शहरों से भी ज्यादा है। छोटे शहरों के उपभोक्ता दाम देखकर पीछे नहीं हटते। सस्ता माल खोजने की बीमारी तो बडे़ शहरों में ज्यादा है। यह नए भारत की हकीकत है।


सवाल: लेकिन, आउटर वियर श्रेणी के कपड़ों और उपकरणों के दाम खासे ज्यादा होते हैं। छोटे शहरों में क्या उनकी पर्याप्त मांग रहती है?
जवाब: छोटे शहरों में क्वालिटी की मांग बडे़ शहरों से ज्यादा है। छोटे शहरों के उपभोक्ता दाम नहीं देखते। सस्ता माल खोजने की बीमारी तो बडे़ शहरों में ज्यादा है। यह नए भारत की हकीकत है। छोटे शहरों के खरीदारों की मानसिकता समझे बिना कंपनियां सफल नहीं हो सकतीं।

सवाल: बंगलूरू में स्थापित इस कंपनी का कितना कारोबार अब दक्षिण भारत से बाहर निकल पाया है?
जवाब: 2010 के आसपास तो हमारा 100 फीसदी कारोबार दक्षिण भारत से ही था। आज सिर्फ एक तिहाई टर्नओवर दक्षिण भारत से है। बाकी देश के दूसरे हिस्सों से। उत्तर भारत और पश्चिम भारत के बाजार मिलकर हमें आधे से ज्यादा कारोबार देते हैं।

सवाल: महिला कामगारों को रोजगार देने के लिए वाइल्डक्राफ्ट की प्रशंसा होती रही है?
जवाब: हमें बताते हुए फख्र है कि हमारे 80 फीसदी कामगार महिलाएं हैं। हमारा तजुर्बा यह रहा है कि महिलाएं कर्मचारी के रूप में ज्यादा समर्पित और स्थायी होती हैं। एक बार सही से प्रशिक्षण पाने के बाद वे बहुत गंभीरता से अपना काम करती हैं।

  • यह सोचना बिलकुल ही गलत है कि महिलाएं ज्यादा छुट्टी लेती हैं या वे हैवी ड्यूटी मशीनरी के काम नहीं कर सकती हैं। वास्तव में महिला कामगार शानदार उत्पादकता दर्शाती हैं। वे न तो बार-बार नौकरी बदलती हैं और न ही अनुशासन संबंधी दिक्कतें आती हैं।


सवाल: कंपनियों का सामाजिक उत्तरदायित्व भी होता है। इसके लिए वाइल्डक्राफ्ट का क्या योगदान है?
जवाब: जैसा कि मैंने बताया हमने कोविड के दौरान कर्नाटक पुलिस को तीन लाख पीपीजी किट निशुल्क प्रदान कीं। कई स्कूलों में भी हम इस तरह से मदद करते रहे हैं। साथ ही, भारतीय सेना के लिए विशेष ऑर्डर के तहत अत्याधुनिक तकनीक के उपकरण और हैजमेट सूट देने में भी हमारी अहम भूमिका रही है।

सवाल: फिर भी वुडलैंड या डिकैथलॉन जैसी कंपनियों के मुकाबले में आपकी प्राइस रेंज कैसी है? ज्यादा या कम?
जवाब: मैं सीधे-सीधे किसी से तुलना नहीं करना चाहूंगा। हमारे प्रोडक्ट इतने अलग हैं कि उनसे एपल-टु-एपल जैसी तुलना हो भी नहीं सकती। बस इतना कहूंगा कि जो अंतरराष्ट्रीय क्वालिटी हम देते हैं, जो ओवरआल वैल्यू या प्रोडक्ट गारंटी वाइल्डक्राफ्ट के प्रोडक्ट के साथ मिलती है, उसे देखते हुए हमारी प्राइस रेंज असाधारण तौर पर किफायती है। मैंने कहा न, हमारा मोटो है...ग्लोबल बेंचमार्क वाली क्वालिटी और एक्सेपशनल अफोर्डेबिलिटी।

सवाल: श्रेष्ठतम क्वालिटी और किफायत? बात कुछ विरोधाभासी लगती है।
जवाब: आपकी प्रतिक्रिया स्वाभाविक है। पहली नजर में विरोधाभास लगता है। लेकिन, कई वजहों से वाइल्डक्राफ्ट ने इसे मुमकिन बनाया है। एक तो हम किसी तीसरे उत्पादक पर निर्भर नहीं हैं। यानी कच्चे माल के लिए भी हमने बैकवर्ड इंटीग्रेशन किया हुआ है। दूसरा, हमारा रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर निवेश। हम अपनी आय का 7 फीसदी तक हिस्सा अनुसंधान और डिजाइन पर खर्च करते हैं। उत्पादन तंत्र को इतना लचीला बनाया है कि कोई हमसे 20 पीस भी मांगेगा तो हम केवल 20 नग बना कर दे देंगे। यानी हमारा इनवेंटरी मैनेजमेंट इतना मजबूत है कि उससे हमारा नुकसान न्यूनतम होता है। फिर हमारे बडे़ कारखाने से हमें बडे़ पैमाने वाले उत्पादन के नेचुरल फायदे मिलते हैं, जिन्हें तकनीकी भाषा में इकनॉमी ऑफ स्केल कहा जाता है।

  • मैन्युफैक्चरिंग में पुराने निवेश का हमें खूब फायदा मिलता है। इस तरह, ओवरऑल हम वैल्यू यानी उपयोगिता का इतना शानदार पैकेज ऑफर करते हैं कि उपभोक्ता को हमारी कीमत रुकावट नहीं मालूम होती। वह अंतत: असाधारण तौर पर किफायती ही साबित होती है।


सवाल: आपके उत्पादों की परिभाषा में ही आउटडोर शब्द है। यानी वे उत्पाद जो घर से बाहर निकलने के बाद ही काम आते हैं। लेकिन, कोविड में तो बाहर निकलने पर ही मनाही थी। उस वक्त आपकी कंपनी के कामकाज को आपने कैसे संभाला?

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जवाब: बेशक, उस वक्त हालत बहुत नाजुक थी। तभी हमें अहसास हुआ कि कंपनी का बुनियादी जज्बा ही अज्ञात में कूदना है, अन्वेषण करना है। कोविड से ज्यादा अज्ञात चीज तब क्या थी। हमने तुरंत फैसले किए। एक अभियान छेड़ा...तैयार हैं हम। उसके तहत हमने रेस्पायरेटर यानी उन्नत किस्म के मास्क और पीपीजी यानी पर्सनल प्रोटेक्शन गियर का बडे़ पैमाने पर उत्पादन आरंभ किया। कर्नाटक पुलिस और भारतीय सेना को इसकी आपूर्ति शुरू की। वास्तव में वक्त की मांग को समझते हुए हमने उत्पादन का अपना समूचा तंत्र ही नई दिशा में मोड़ दिया। कोविड से पहले हम 45-50 लाख पीस का प्रोडक्शन कर रहे  थे। कोविड में वह आंकड़ा 4.50 करोड़ तक पहुंच गया।

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