दो करोड़ टन उत्पादन क्षमता और 10 हजार वितरक-डीलरों वाली एमपी बिरला सीमेंट के एमडी-सीईओ संदीप घोष कहते हैं कि सरकार की तरह उनकी कंपनी का फोकस भी छोटे मकानों पर है। आने वाले समय में सीमेंट की मांग अच्छी रहने वाली है। हाल में पेश बजट को सीमेंट क्षेत्र के लिए बहुत अच्छा मानने वाले एमपी बिरला सीमेंट के एमडी-सीईओ संदीप घोष से कंपनी के कोलकाता स्थित मुख्यालय में वरिष्ठ पत्रकार संजय अभिज्ञान ने बातचीत की। पेश है प्रमुख अंश...
हाल में घोषित केंद्रीय बजट का सीमेंट उद्योग पर क्या असर होने जा रहा है?
सीमेंट क्षेत्र के लिए तो बजट में मुस्कुराने की कई वजह हैं। एक तो बजट का फोकस इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर है। सागरमाला और गतिशक्ति परियोजनाएं निर्माण की प्रचुर संभावना रखती हैं। एनसीआर से मुंबई तक एक्सप्रेस-वे इसकी ताजा मिसाल है। बजट ने प्रधानमंत्री आवास योजना और शहरों में छोटे किफायती आवासों पर अपना फोकस कायम रखा है। दूसरी तरफ, यूपी जैसे राज्यों में निवेश का माहौल तेजी से सुधरता जा रहा है। इससे कमर्शियल रियल एस्टेट की मांग बढ़नी तय है। इन सबसे कंस्ट्रक्शन उद्योग में बूम आना ही है, जो सीमेंट की मांग में वृद्धि की गारंटी देता है।
उत्तर प्रदेश और हिंदी बेल्ट के दूसरे राज्य एमपी बिरला के कारोबारी नेटवर्क में कितनी अहमियत रखते हैं?
हमारा 25 फीसदी कारोबार अकेले उत्तरप्रदेश से आता है। सम्राट और परफेक्ट प्लस यूपी में हमारे सबसे मजबूत ब्रांड हैं। प्रयागराज और बनारस जैसे स्थानों पर एमपी बिरला सीमेंट नंबर वन है। रायबरेली में दो संयंत्र हैं। मध्य प्रदेश के सतना और रायबरेली के संयंत्रों से यूपी की मांग पूरी करने का प्रयास रहता है। मध्यप्रदेश में दो संयंत्र हैं। राजस्थान के चंदेरिया में भी हमारा संयंत्र है। अब प्रयास देश के दूसरे हिस्सों में पैठ बनाने का है।
इसीलिए नया और आधुनिक संयंत्र महाराष्ट्र के मुकुटबन में स्थापित हुआ?
देश के जिस दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में आने वाले वर्षों में जबरदस्त निर्माण गतिविधियों की संभावना है, वहां के राज्यों की तरफ बढ़ा जाए। 20 लाख टन क्षमता वाला मुकुटबन प्लांट हमारा अत्याधुनिक प्लांट है। कोविड के कारण उसके शुरू होने में विलंब हुआ। लेकिन, अब उसमें उत्पादन होने लगा है।
चालू वित्तवर्ष की तीसरी तिमाही कंपनी की बैलेंसशीट के लिए अच्छी खबर लेकर नहीं आई। घाटा दर्ज होने की चुनौती को आप कैसे देखते हैं?
तीसरी तिमाही के हालात सामान्य नहीं थे। कोविड में लगभग सभी सीमेंट कंपनियों ने अच्छा लाभ कमाया था, तो इसलिए हमारा मुकाबला हायर बेस के साथ था। यूक्रेन युद्ध के कारण पेट्रो उत्पाद महंगे हुए और ईंधन की लागत बढ़ गई। इसका भी असर तिमाही नतीजों पर पड़ा। तीसरी घटना यह हुई कि महाराष्ट्र का हमारा मुकुटबन प्लांट कोविड के कारण देर से चल पाया। रही सही कसर दाम न बढ़ा सकने की मजबूरी ने पूरी कर दी। कुल मिलाकर मुनाफा कुछ सिकुड़ गया। लेकिन, सकारात्मक बात यह है कि उत्पादन में 9 फीसदी की बढ़त दर कायम रही, जो उद्योग की अन्य बड़ी कंपनियों से कदमताल करती है।
एमपी बिरला सीमेंट में यह आपकी दूसरी पारी है। कोविड से पहले तक आप यहीं थे। दूसरी पारी की मुख्य चुनौतियां?
प्रमुख चुनौती यही है कि तेजी से बदलती तकनीक के दौर में कंपनी को कैसे प्रासंगिक बनाए रखना है। यह ‘एज ऑफ डिसरप्शन’ है। तकनीक की एक करवट किसी भी कंपनी को घुटनों पर बिठा सकती है। बिजनेस का बाहरी माहौल, बदली कार्यशैली, राष्ट्रीय अर्थतंत्र के नए रूप को लगातार समझते रहना...यही मुझे अपनी इस नई पारी की चुनौतियां मालूम होती हैं।
कंपनी का टारगेट कस्टमर कौन है?
छोटे मकान बनाने वाले व्यक्तिगत ग्राहकों की जरूरतें पूरी करना हमारा ध्येय है। इसके लिए हम कस्टमर सर्विस सेल का नेटवर्क तैयार कर रहे हैं। कस्टमर सर्विस वैन की एक चेन खड़ी कर रहे हैं। इस वैन का मतलब होगा वन स्टॉप साल्यूशन पाइंट। उससे कस्टमर को सीमेंट ही नहीं, मकान या दुकान निर्माण के सभी पहलुओं में मदद मिलेगी। कंकरीट की मजबूती की टेस्टिंग सुविधा भी मिलेगी।
सबसे तरल बदलाव तो ऑनलाइन कारोबार में हो रहे हैं। सीमेंट जैसे पारंपरिक सेगमेंट के लिए डिजिटल तकनीक कितनी अहम है?
सीधा जवाब नहीं हो सकता। यूं समझिए कि बात सिर्फ मार्केटिंग की नहीं है कि आपने अमेजन पर पसंद कर सीमेंट का एक ब्रांड चुन लिया। मैं देख रहा हूं कि तकनीक की मांग यह है कि पूरा गुलदस्ता भावी खरीदार के लिए पेश करना होगा। मतलब, पूरा पैकेज जिसमें सीमेंट ही नहीं, मकान का डिजाइन, दूसरे कच्चे सामान, निर्माण सामग्री, इंटीरियर की चीजें, सब कुछ एक बुके में पेश करना होगा। दूसरा मामला, प्रोडक्शन प्लांट की तकनीक का है। वहां हमें एआई, मशीन लर्निंग, थ्री डी प्रिंटिंग, सबका उपयोग करके उत्पादन प्रक्रिया को अत्याधुनिक बनाना होगा।
लेकिन, क्या आम सीमेंट उपभोक्ता आज इतना परिपक्व या जागरूक है?
मैं देखता हूं कि सीमेंट उपभोक्ता अब आंख मूंदकर किसी भेड़चाल का हिस्सा नहीं बनते। वे इकोफ्रेंडली सीमेंट की तरफ देख रहे हैं। इकोफ्रेंडली सीमेंट मतलब जिसमें क्लिंकर की मात्रा कम है और फ्लाई एश या स्लैग की ज्यादा है। इसे ग्रीन सीमेंट या ब्लेंडेड सीमेंट भी कहा जाता है। अब लोग समझ गए हैं कि कम क्लिंकर वाला ग्रीन सीमेंट मजबूती में कम नहीं होता। इसी तरह, कस्टमर ऐसा निर्माण भी चुन रहा हो जो सीमेंट की कम मात्रा में भी काम चला ले। इसे यूं भी समझ सकते हैं कि आज जागरूक मकान निर्माता बहुत बडे़ मकानों की बजाय छोटे किफायती मकानों को तरजीह दे रहा है। मुझे नए दौर के होमबिल्डर के ये सभी लक्षण जागरूकता के प्रमाण मालूम होते हैं। इसमें संसाधनों की किफायत की ध्वनि है।
सामाजिक उत्तरदायित्व के तकाजे कंपनी कैसे पूरे करती है?
बिरला कॉरपोरेशन के अस्पतालों और शैक्षिक संस्थानों के बारे में तो सब जानते ही हैं। चित्तौड़, सतना के अस्पतालों समेत देश के दूसरे हिस्सों में भी हमारे अस्पताल हैं। अगर हम मुकुटबन प्लांट की बात करें तो वह सारा क्षेत्र कॉटन सॉयल वाला है। कपास की उपज के लिए वहां की मिट्टी बहुत मुफीद है। हम कोशिश कर रहे हैं कि उस मिट्टी की उत्पादकता को अधिकतम किया जाए। इसके लिए हम कॉटन क्ले नाम के एनजीओ की मदद ले रहे हैं।