अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने ब्याज दरों में कटौती के मसलेपर केंद्रीय बैंकों से सावधान रहने को कहा है। जॉर्जीवा ने गुरुवार को दावोस में विश्व आर्थिक मंच की सलाना बैठक के दौरान कहा कि 2024 में ब्याज दरों में गिरावट जारी रहनी चाहिए लेकिन यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि नीतिगत गलती की कोई गुंजाइश नहीं है, क्योंकि अंतिम मील तक पहुंचना 'बहुत, बहुत मुश्किल' है।
विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक 2024 के दौरान एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंकों को समय से पहले सख्ती नहीं करनी चाहिए क्योंकि तब वे उस जीत को खो सकते हैं जो फिलहाल उनके हाथों में है।
2024 में सकारात्मक रुझान जारी रहने की उम्मीद करते हुए, उन्होंने कहा मुद्रास्फीति की दर औसतन नीचे जा रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रबंध निदेशक ने हालांकि क्षेत्रीय विसंगतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा, "अब हमारे पास एक बहुत ही विविध रेंज है। कुछ देशों में, काम पहले ही हो चुका है, और मुद्रास्फीति इतनी कम है कि वे एक उदार मौद्रिक नीति को अपना सकते हैँ। ब्राजील इसका एक उदाहरण है। एशिया में, कई देशों में मुद्रास्फीति की समस्या ही नहीं है।"
उन्होंने कहा, "केंद्रीय बैंकों को समय से पहले सख्ती नहीं करनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से वे अपनी बढ़त खो सकते हैं। लेकिन अगर उन्होंने सुस्ती बरती तो वे अर्थव्यवस्था में मंदी ला सकते हैं। उन्होंने विभिन्न देशों के नीति निर्माताओं से सावधानी बरतने और डेटा पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया।
आईएमएफ प्रमुख ने कहा "अमेरिका में श्रम बाजार बहुत तंग है और मजदूरी अब मुद्रास्फीति से ऊपर जा रही है। इसका क्या मतलब है? इसका मतलब है लोगों के पास खर्च करने के लिए अधिक पैसा है और जब वे अधिक खर्च करते हैं, तो इससे कीमतों पर दबाव बढ़ता है।"