केंद्र सरकार ने थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, आयातकों और मिलों के लिए अक्तूबर तक अरहर और उड़द दाल के भंडारण की सीमा तय कर दी है। जमाखोरी रोकने और भारतीय खान पान के अहम हिस्सा इन उत्पादों की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए यह कदम उठाया है। केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय ने इस संबंध में एक आदेश जारी किया है जो तत्काल प्रभाव से लागू भी हो गया है।
आदेश के मुताबिक, थोक विक्रताओं के लिए अरहर और उड़द प्रत्येक की 200 टन और खुदरा विक्रताओं और खुदरा दुकानों के लिए 5 टन स्टॉक रखने की सीमा तय की गई है। बड़ी शृंखला वाले खुदरा विक्रेता अपने डिपो में प्रत्येक का 200 टन तक भंडारण कर सकते हैं। मिलों के लिए उनके आखिरी तीन महीने के उत्पादन या वार्षिक संस्थापित क्षमता के 25 प्रतिशत में से जो भी अधिक है, उतने के भंडारण की सीमा निर्धारित की गई है।
इसी तरह आयातकों को सीमा शुल्क से निकासी के बाद 30 से अधिक समय तक स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। उपभोक्ता सचिव रोहित कुमार सिंह ने कहा कि भंडारण सीमा का यह आदेश 31 अक्तूबर तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए है। बता दें कि अरहर दाल का अखिल भारतीय औसत मूल्य 2 जिन को 122.68 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जो एक साल पहले के 103.25 रुपये किलोग्राम की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह, उक्त अवधि में उड़द दाल की कीमत 110.58 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जो एक साल पहले के 105.05 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में 5.26 फीसदी ज्यादा है।